ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 16, सितम्बर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

छंद

 उ

*श्रद्धांजलि*

 

 

कुछ दोहे


 

 

अच्छा है संसार में, यह किस्मत का खेल

कातिल को कुर्सी मिले, फरियादी को जेल ।

 

सब कुछ उलटा हो गया, आज कार्य व्यापार

थाने में जन्माष्टमी, आश्रम में हथियार ।

 

दूध दुहे बल्टा भरे, गये शहर की ओर

दिन डूबा दारू पिये, लौटे नन्द किशोर ।

 

पन्नी पर पन्नी चढ़ी, हुए मंच सब टंच

सबसे ज़्यादा टंच जो, वही हुआ सरपंच ।

 

सुनता हूँ जिस दिन मिला तीन लाख अनुदान

नई जीप में बैठकर, लौटे घर परधान ।

 

भवन बने या पुल बने, बनते परमानेन्ट

नब्बे प्रतिशत रेत है, दस प्रतिशत सीमेन्ट ।

 

बिके हुए हैं लोग ये कैसे करें विरोध

कभी आपने सुना है हिजड़ा और निरोध ।

 

गांधी, जेपी, लोहिया, करते पश्चाताप

कैसे अनुयायी हुए, अरे बाप रे बाप ।

 

भ्रम विकल्प का आशय, बदल गये आयाम

बिजली घर में हो रहा, जनरेटर से काम ।

 

आज़ादी के बाद का, ये है हिन्दुस्तान

मरी हुई है आत्मा, गिरा हुआ ईमान ।

  स्व. कैलाश गौतम

 

 

  छंदकार

माह के छंदकार

 00 कैलाश गौतम 0

  - तेज धूप में

  - किस्मत हो तो ऐसी

  - बच्चू बाबू

  - गुपतेसरा

  - कुछ दोहे

 

गीत

- आनंदी सहाय शुक्ल

- ज्ञानेन्द्र साज

- अनिल अनवर

- रामदयाल

- डॉ. अजय पाठक

नवगीत

- डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

- नईम

- ऋषिवंश

- विद्यानंदन राजीव

- इंदिरा मोहन

ग़ज़ल

- रईस अहमद 'फ़िगार'

- अग्निवेश शुक्ल

- तुली फकीरचंद जलंधरी

- सुल्तान अहमद

- विज्ञान व्रत

दोहे

- चंद्रसेन विराट

- आचार्य भगवत दुबे

- पुरुषोत्तम 'यक़ीन'

- प्रभु त्रिवेदी

- जितेन्द्र जौहर

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com