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उ *श्रद्धांजलि*
कुछ दोहे
अच्छा है संसार में, यह किस्मत का खेल कातिल को कुर्सी मिले, फरियादी को जेल ।
सब कुछ उलटा हो गया, आज कार्य व्यापार थाने में जन्माष्टमी, आश्रम में हथियार ।
दूध दुहे बल्टा भरे, गये शहर की ओर दिन डूबा दारू पिये, लौटे नन्द किशोर ।
पन्नी पर पन्नी चढ़ी, हुए मंच सब टंच सबसे ज़्यादा टंच जो, वही हुआ सरपंच ।
सुनता हूँ जिस दिन मिला तीन लाख अनुदान नई जीप में बैठकर, लौटे घर परधान ।
भवन बने या पुल बने, बनते परमानेन्ट नब्बे प्रतिशत रेत है, दस प्रतिशत सीमेन्ट ।
बिके हुए हैं लोग ये कैसे करें विरोध कभी आपने सुना है हिजड़ा और निरोध ।
गांधी, जेपी, लोहिया, करते पश्चाताप कैसे अनुयायी हुए, अरे बाप रे बाप ।
भ्रम विकल्प का आशय, बदल गये आयाम बिजली घर में हो रहा, जनरेटर से काम ।
आज़ादी के बाद का, ये है हिन्दुस्तान मरी हुई है आत्मा, गिरा हुआ ईमान ।
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