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उ *श्रद्धांजलि*
गुपतेसरा
गुपतेसरा ने खोली है दुकान गाँव में काट रहा है चाँदी वह बेईमान गाँव में । गाँजा है, भाँग है, अफीम, चरस दारू है ठेंगे पर देश और संविधान गाँव में ।
चाय पान बीड़ी सिगरेट तो बहाना है असली है चकलाघर बेजुबान गाँव में । बम चाकू बंदूकों पिस्तौलों का धन्धा हथियारों की जैसे एक खान गाँव में ।
बिमली का पेट गिरा कमली का फूला है सोते हैं थाने के दो दीवाने गाँव में । खिसकी है पाँव की ज़मीन अभी थोड़ी सी बाकी है गिरने को आसमान गाँव में ।
सूखा है पाला है बाढ़ है वसूली है किसको दे कंधे का हल किसान गाँव में गुपतेसरा गुण्डा है और पहुँच वाला है कैसे हो लोगों को इत्मीनान गाँव में ।
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