|
|
|
||||||||||
|
|
|||||||||||
|
|
||||||||||||
|
उ
आचरण है डॉ. अजय पाठक
भाव झूठा, शब्द झूठे और खंडित व्याकरण है आज भीगा आँसुओं में गीत का अंतःकरण है ।
डालियों पर अब नहीं वह फूल की मोहक छटायें अब नहीं सावन सुहाना, अब नहीं काली घटायें । बेहयाई के नगर में प्रेम लावारिस खड़ा है आज गणिका की तरह हर नायिका का आचरण है ।
आज दर्पण ही बिगड़ते, रुप का चारण बना है और वैभव प्रेयसी के नेह का कारण बना है । प्यार में दरियादिली का आज केवल है दिखावा किन्तु भीतर में उफनते लोभ का ही संभरण है ।
प्रेम के बदले कठिन है प्रेम का प्रतिसाद पाना अब कहाँ मीरा दीवानी अब कहाँ नटवर दीवाना । मौन है मुरली यथावत मौन पायल हो गई है कृष्ण-राधा आज केवल पुस्तकों के उद्धरण हैं ।
लेन-3, बिनोबा नगर बिलासपुर, छत्तीसगढ़
|
|
|
||||||||||
|
|
||||||||||||
|
||||||||||||