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वर्ष- 2, अंक - 16, सितम्बर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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  छंद

 उ

 

 

 

आचरण है


डॉ. अजय पाठक

 

 

भाव झूठा, शब्द झूठे और खंडित व्याकरण है

आज भीगा आँसुओं में गीत का अंतःकरण है ।

 

डालियों पर अब नहीं वह फूल की मोहक छटायें

अब नहीं सावन सुहाना, अब नहीं काली घटायें ।

बेहयाई के नगर में प्रेम लावारिस खड़ा है

आज गणिका की तरह हर नायिका का आचरण है ।

 

आज दर्पण ही बिगड़ते, रुप का चारण बना है

और वैभव प्रेयसी के नेह का कारण बना है ।

प्यार में दरियादिली का आज केवल है दिखावा

किन्तु भीतर में उफनते लोभ का ही संभरण है ।

 

प्रेम के बदले कठिन है प्रेम का प्रतिसाद पाना

अब कहाँ मीरा दीवानी अब कहाँ नटवर दीवाना ।

मौन है मुरली यथावत मौन पायल हो गई है

कृष्ण-राधा आज केवल पुस्तकों के उद्धरण हैं ।

 

डॉ. अजय पाठक

लेन-3, बिनोबा नगर

बिलासपुर, छत्तीसगढ़

 

  छंदकार

गीत

- आनंदी सहाय शुक्ल

- ज्ञानेन्द्र साज

- अनिल अनवर

- रामदयाल

- डॉ. अजय पाठक

नवगीत

- डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

- नईम

- ऋषिवंश

- विद्यानंदन राजीव

- इंदिरा मोहन

ग़ज़ल

- रईस अहमद 'फ़िगार'

- अग्निवेश शुक्ल

- तुली फकीरचंद जलंधरी

- सुल्तान अहमद

- विज्ञान व्रत

दोहे

- चंद्रसेन विराट

- आचार्य भगवत दुबे

- पुरुषोत्तम 'यक़ीन'

- प्रभु त्रिवेदी

- जितेन्द्र जौहर

माह के छंदकार

- कैलाश गौतम

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