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उ
बिंदी की ख़ामोशी विज्ञान व्रत
दिल भी वो है धड़कन भी वो चेहरा भी वो दरपन भी वो ।
जीवन तो वो पहले भी था अब जीवन का दर्शन भी वो ।
आज़ादी की परिभाषा भी जनम-जनम का बंधन भी वो ।
बिंदी की ख़ामोशी भी है खन-खन करता कंगन भी वो ।
प्रश्नों का हल भी लगता है और जटिल सी उलझन भी वो ।
एम - 138, सेक्टर 25 नोयड़ा - 201301
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