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भगतसिंह
सोनी की चार कविताएँ
उड़नछू
मैंने घुसते ही जाना
कि वह है गेटवे ऑफ इण्डिया।
मैं उत्साहित होने ही वाला था
कि कर दिया गया
कबूतरों की उड़ान से
चौकन्ना।
त्रिमूर्ति
एलीफेण्टा गुफाओं की त्रिमूर्ति से
मिलाता रहा
अपना चेहरा
कहीं कुछ फर्क नहीं दिखा।
मैंने सेल्यूट की तरह ही
दाग दी हँसी।
मेरी हँसी बाजू खड़े जोड़े ने
चुरा ली,
मैं मूर्ति हो गया।
दूध गंध
नदियाँ अपने बिस्तरों पर पड़ी रहीं
मैंने जगाया नहीं उन्हें।
उन की आँखों में
मैंने नहीं देखा
दूध-घी
केवल खोलता हुआ लहू था
दूध गंध
फिर किधर से आई ?
चुनाव
मैंने हारकर
चुन लिया है एक सूखा वृक्ष
जिसकी जड़े गई है धरती के छोरों तक
निकलेंगे ही एक दिन हरे पत्ते।
भगतसिंह सोनी
इंदिरा
बिल्डिंग, 27/622, न्यू शांति नगर
रायपुर, छत्तीसगढ़ - 492007
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