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इंटरनेट आम आदमी तक नहीं पहुँचा तो इसका
कोई मतलब नहीं है
–
जतीन्द्र दास
कहते हैं जहाँ चाह है वहाँ राह है । इसे साबित किया है हिंदी,
उडिया,और अँग्रेज़ी तीन-तीन भाषा के युवा पत्रकार जतीन दाश ने
। पढ़ाई-लिखाई के समय से ही विकास के लिए पत्रकारिता से जुड़कर
उसे ही अपने कैरियर के रूप में अपनाने वाले पत्रकार जतिन को
वर्ष 2007 के मंथन एवार्ड से सम्मानित किया गया है ।
प्रस्तुत है सृजनगाथा की उनसे हुई बातचीत के
खास अंश -
संपादक
उड़ीसा के देवगढ़ जिला के एक छोटे से गाँव
गोगुआ, में
जन्मे (जन्म 9 मार्च 1967) जतीन जब सुवर्णपुर, जिला कॉलेज़ में
पढ़ रहे थे उस समय से ही पत्रकारिता की ओर झुकने लगे और उड़ीसा
के अँग्रेज़ी समाचार पत्र (न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड) से जुड़कर
पत्रकारिता के क्षेत्र में पहला कदम रखा । तब से लेकर आज तक
देश के कई प्रमुख समाचार पत्रों से जुड़े रहे, जिसमें
पांचजन्य, ऑर्गनाइज़र, ब्लिट्ज (हिंदी-अँग्रेज़ी), धर्मयुग,
नुतन सबेरा, रेडियो, करेंट न्यूज़, सामना, डेमोक्रेटिक वर्ल्ड
आदि को गिनाया जा सकता है । वे अँग्रेज़ी ब्लिट्ज़ में 6 साल
काम करने के बाद 1999 से समाचार एजेंसी इंडो एशियन न्यूज़
सर्विस के विशेष संवाददाता के रूप में जुड़ गये और अभी तक
कार्यरत हैं। अब तक विश्व के कई देशों की यात्रानुभव अर्जित कर
चुके हैं । विज्ञान, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर
केंद्रित उनके समाचार-आलेखों विश्व भर पढ़े और सराहे जाते हैं
।
वे बताते हैं - जानकारी मिली कि वे
लोग अपने राज्य से कोई
समाचार
प्राप्त नहीं कर पाते हैं । जब कोई बड़ी घटना होती है जैसे
बाढ़, वात्या, आदि तब टी.वी और समाचार पत्रों में दिखाई देता है
। क्यों न प्रवासी उडिया लोगों के लिए कुछ किया जाय । इसका हल
करने के उद्देश्य से उड़ीसा डॉट कॉम का जन्म हुआ
–नवंबर
2004 में । उड़ीसा डॉट कॉम काफी हद तक प्रवासी उडिया लोगं को
अपने मातृभूमि के साथ जोड़ने में कामयाब हुआ है । इसके बाद
दूसरे भारतीय भाषाओं में ऐसा ही पोर्टल बनाने को सोचा ।
छत्तीसगढ़ उड़ीसा से लगा पड़ोसी प्रांत है और राज्य भाषा हिंदी
है । मैं स्वयं भी हिंदी में लिखता था । सोचा करके देखा जाय ।
और अब छत्तीसगढ़ डॉट इन आपके सामने है ।"
प्रश्न- उड़िया भाषी होते हुए कैसे हिंदी की ओर प्रस्थान किया
?
उत्तर –
हिंदी राष्ट्रभाषा है और मैं ख़ुद हिंदी में काम कर चुका हूँ ।
इस भाषा के ज़रिए देश के एक बड़े समुदाय तक पहुँचा जा सकता है
।
प्रश्न- वेब में हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए समाचार माध्यमों को
ही क्यों चुना ?
उत्तर- जो इंटरनेट का उपयोग करते हैं उनमें से 64 प्रतिशत लोग
समाचार पढ़ने के लिए उस माध्यम का उपयोग करते हैं । हमारा
उद्देश्य है न सिर्फ़ समाचार देना बाकी दूसरे सारे सुविधा जो
एक आदमी को वेब में मिलता है उसको हिंदी में उपलब्ध कराना ।
सारी सुविधा का मतलब सर्फिंग, हिंदी में बूगिंग चार्ट,
मेट्रिमोनी आदि । वे सारे सुविधाएँ जो देख गठन में काम आ सके ।
प्रश्न –
हिंदी इंटरनेट की स्थिति क्या है
?
उत्तर –
इंटरनेट में हिंदी ठीक-ठाक उपलब्ध हो सके इसके लिए सभी स्तरों
में प्रयास जारी है । फिर भी इस क्षेत्र में कई काम अभी बाकी
है । आज महत्वपूर्ण कंटेंट की भी आवश्यकता है । भविष्य उज्जवल
है । हिंदी पोर्टल्स की संख्या गिने चुने हैं ।
प्रश्न- सरकारी प्रयासों में कहाँ कमियाँ रह गई हैं जो नेट पर
हिंदी अन्य भाषाओं की अपेक्षा पिछड़ गई?
उत्तर –
सरकार न केवल हिंदी बल्कि सभी स्थानीय भाषाओं में हो रहे
उद्योमों को प्रोत्साहन देना चाहिए। वैज्ञानिक ज्ञान या
टेकनॉलाज़ी का फ़ायदा अगर आम आदमी तक नहीं पहुँचा तो इसका कोई
मतलब नहीं है । राष्ट्रभाषा और प्रादेशिक भाषा के ज़रिए
जनसमुदाय, आम आदमी तक पहुंचा जा सकता है ।
प्रश्न- हिंदी की श्रीवृद्धि के लिए तकनीकी स्तर पर और कौन-कौन
से प्रयास या कार्य ज़रूरी है?
आपकी भविष्य की कार्ययोजना
?
उत्तर- इसके लिए सरकारी और निजी उद्यमों की ज़रुरत है ।
इंटरनेट एक नया ज़रिया है । जिसके जरिये इसका विकास किया जा
सकता है । देश में अपने हिंदी साहित्य पत्रिका की संख्या बहुत
कम है। यह बढ़ना चाहिए । इंटरनेट पर भी इसकी कमी महसूस किया जा
रहा है । आप जैसे बहुत कम लोग है जो हिंदी के प्रचार-प्रसार
में जूटे हुए हैं । इंटरनेट में अच्छे-अच्छे
कंटेंट आना चाहिए । विश्ववासी को यह बतायेगा कि हिंदी कैसे
श्रेष्ठ भाषा है ।
www.36garh.in
के बाद हम Region
specific
साइट दूसरे हिंदी भाषी राज्यों में प्रारंभ करने की सोच में है
।
प्रश्न- मंथन एवार्ड तक पहुंचने में अपनी साधना और संघर्ष की
कहानी ?
उत्तर- 2004 में कनाड़ा गया था । और वहाँ कुछ उड़ियाभाषी लोगों
से मिला । नवंबर 2004 से उड़ीसा डॉट कॉम अनवरत संचालित है ।
विश्व भर से उडिया लोगों के संपर्कित और संबंधित समाचार, आलेख
प्रकाशित करने का प्रयास जारी है । मंथन एवार्ड का एक हिस्सा
है उड़ीसा डॉट कॉम ।
हमारे इस पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि इसमें
समाचार लेखन शेली स्थानीय समाचार पत्रों से भिन्न है । इसकी हर
समाचार का शीर्षक 6 ले 8 शब्द के भीतर सीमित है । प्रारंभिक
वाक्य 25 से 30 शब्द के भीतर है । ज़्यादा तर हम राज्य के
विकास और उडिया लोगों के सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक विकास हो
इसका आगे रखकर समाचार परोसते हैं ।
मंथन एवार्ड के लिए इस साल हमने आवेदन नहीं किया था लेकिन किसी
पाठक या शुभेच्छु के द्वारा प्रेषित नॉमिनेशन को विचार करते
हुए इस पुरस्कार के लिए चयन किया गया । यह हमारे सामुहिक
प्रयास का प्रतिफल है और प्रेरणा भी । हम अच्छे प्रयास करते
रहें और समाज के विकास में अपना योगदान दें यही हम सबों का
प्रयास होना चाहिए । उड़ीसा डॉट कॉम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह
है कि यह प्रवासी उडिया लोगों को उनके मूल से जोड़ने में अधिक
सहायक हुआ है । राज्य के ऐसे कई उदाहरण है जहाँ इसमें समाचार
पढ़कर प्रवासी उडिया राज्य के कई लोगों को सहायता उपलब्ध
करवाये हैं । इस तरह राज्य में जिसके इंटरनेट का ज्ञान नहीं है
उनको इंटरनेट का व्यवहार करने में प्रेरित किया है ।
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