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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

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वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

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इस अंक में पढ़िये

कविताएँ

माह के कवि - क्रांति

तरुण भटनागर की तीन कविताएँ

रामेश्वर कांबोज की दो कविताएँ

भगतसिंह सोनी की चार कविताएँ

 

 

छंद

नवगीत - छविनाथ मिश्र, डॉ. शिव भदैरिया, डॉ. किशोर काबरा

गीत/ग़ज़ल - डॉ.रामदरश मिश्र, अक्षय गोजा, जीवन मंयक

दोहा - डॉ. रामनिवास मानव

 

 भाषांतर

कविताएँ

रोबर्तो हुआरोज़  (अर्जेंटीना)

फ़रूग फ़रूखजाद (ईरान)

कुसुमाग्रज (मराठी)

ग्रेस (मराठी)

पंजाबी उपन्यास

रेत - हरजीत अटवाल - अनुवादः सुभाष नीरव - भाग 2

  उस दिन के बाद मैंने बीटर्स के विषय में सोचना बन्द कर दिया। मुझे औरत के साथ दोस्ती की भूख तो थी, पर दो बच्चों की माँ नहीं चाहिए थी। मुझे सांडरां जैसी अकेली इकहरी औरत चाहिए थी। सांडरां के साथ किसी तरह की आत्मीयता नहीं बन सकी थी, इसलिए मैं उससे किनारा कर गया।....

 

 

व्याकरण

एक शब्द - मिलना-मिलाना - डॉ.गंगाप्रसाद बरसैंया

 

 

संस्कार

भारतीय बालसाहित्य और विश्व-परिदृश्य- डॉ. श्यामसिंह शशि

हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के बालसाहित्य को आज भी प्रायः दोयम दर्जे का साहित्य माना जाता है। इसमें दोष लेखक-प्रकाशक दोनों का है। हमारे देश का लेखक अपवाद को छोड़कर अपनी रचना के अलावा किसी और को पढ़ना नहीं चाहता।....

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उर्दू साहित्य की भारतीय आत्मा - राही मासूम रज़ा

इस देश में कई धर्म समा सकते हैं, परंतु एक देश में कई क़ौमें नहीं समा करतीं ! परंतु यह सीधी-सी बात भी अब तक बहुत से हिंदुओं (हिंदुस्तानियों) की समझ में नहीं आ सकी है। हमें धर्म की यह ऐनक उतारनी पड़ेगी। इस ऐनक का नंबर गलत हो गया है् और अपना देश हमें धुँधला-धुँधला दिखाई दे रहा है।....

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एक नये समीक्षक को सलाह - जार्ज बर्नार्ड शॉ  (चौंथा भा)

 

संस्मरण....

पींकिग रेडियो जिन्हें कोसता था - डॉ. विमल कुमार पाठक

(गोपाल सिंह नेपाली को याद करते हुए जाने माने कवि)

नेपालीजी को मैं रायपुर में अपने निवास स्थान ब्राम्हणपारा में भोजन के लिए आमंत्रित किया । तब मैं अपनी ससुराल में  निवासरत था। घर पर मेरी पत्नी, मेरी सास और साले साहब तथा एक साली उस समय थे। लगभग दो तीन घंटे वे घर पर रहे । मुझसे कहे बहु से मिलवाओ।....

 

शोध ग्रंथ

हिंदी लघुकथा का विकास (भाग-3) - डॉ. अंजलि शर्मा

 

विचार वीथी

फैसला सुरक्षित है - प्रतिभा सक्सेना

 

लोक - आलोक

सर्प और दयालु किसान - कमलेश माथुर

 

शेष-विशेष

इन दिनों....

शासन की हिंसा नहीं आतंक का जवाब - विश्वनाथ सचदेव

राजकाज....

क्या है जिन्नाह के सपनों का पाकिस्तान? - तनवीर जाफ़री

परिचर्चा....

बाल साहित्य कैसा हो ? -  डॉ. शमशेर अहमद खान

प्रसंगवश....

नोबल से ऊँचा है गांधी का 'दर्शन' - तनवीर जाफ़री

मीडिया.... 

बाजारीकृत मीडिया में साहित्य - संजय कुमार

विदेशों की सांस्कृतिक डायरी...

अमेरिका की धरती से - लावण्या शाह

न्यूज़ीलैंड की चिट्ठी - रोहित कुमार हैप्पी

 

हलचल

(देश-विदेश की प्रमुख सांस्कृतिक गतिविधियाँ )

हिंदी टूलबार 'हिंदीगाथा' का लोकार्पण

विश्व हिंदी न्यास का सातवाँ अधिवेशन संपन्न

चुनौती के बावजूद हिंदी का भविष्य उज्ज्वल

रफ़्तार को मिला मंथन अवार्ड

कन्हैयालाल नन्दन निराला सम्मान से विभूषित

जयपुर में हिन्दी वेब पत्रकारिता पर संगोष्ठी

रूसी कवियत्री की वर्षगाँठ पर चित्रकला प्रदर्शनी

"प्रवासी साहित्य को भी मुख्यधारा साहित्य मानना चाहिये"

पृथ्वी से बैकुंठ की दूरी 12 लाख योजन

राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान-2008 हेतु प्रविष्टियाँ आमन्त्रित

16वॉ लघुकथा लेखक सम्मेलन इंदौर में संपन्न

देश-विदेश की सांस्कृतिक गतिविधियाँ

      

संपादकीय

अमेरिका में सतीश गुप्ता का दीवाली मेला

जयप्रकाश मानस

            क्या प्रवास या परदेश में निवास देश-प्रेम जगाने का सही ज़रिया हो सकता है ? दरअसल यह स्मृति का तकाज़ा है जो छूटे, बिछुड़े या विलग हुए चीजें मन को अधिक टेरती है । वे जीवन में अधिक स्थान घेरती हैं । जो भी हो, विश्व को हाँकने का दंभ भरने वाले दादा देश अमेरिका में भारतीय संस्कृति को प्रतिष्ठित करने की दिशा में ऐसे मेलों को मात्र मीट टूगेदर का ज़रिया नहीं कह सकते ।...

 

ललित निबंध

अमावस्या के हृदय में लक्ष्मी - कुबेरनाथ राय

इसका प्रकारान्तर से अर्थ यह हुआ कि सही लक्ष्मी वह है जो शील और मर्यादा को रखते हुए उपलब्ध की जाये और चोरी, बेमानी, मर्यादाहीन आचरण द्वारा नहीं, बल्कि पुरुषार्थ के पथ से उपलब्ध की जाये। अमावस्या के हृदय में सिनीवाली है। कालिका के हृदय में लक्ष्मी है। ह्वी के भीतर  ‘श्री है।....

दुनिया का स्वर्ग और गुलामी - गोविंद कुमार 'गुंजन'

 

कथोपकथन

  इंटरनेट पर अच्छे कंटेंट आना चाहिए जतीन्द्र दास

इंटरनेट एक नया ज़रिया है । जिसके जरिये इसका विकास किया जा सकता है । देश में अपने हिंदी साहित्य पत्रिका की संख्या बहुत कम है। यह बढ़ना चाहिए । इंटरनेट पर भी इसकी कमी महसूस किया जा  रहा है । आप जैसे बहुत कम लोग है जो हिंदी के प्रचार-प्रसार में जूटे हुए हैं । इंटरनेट में अच्छे-अच्छे कंटेंट आना चाहिए । विश्ववासी को यह बतायेगा कि हिंदी कैसे श्रेष्ठ भाषा है ।....

 

कहानियाँ

कड़वा सच - स्वर्ण ज्योति (अहिंदीभाषी कथाकार)

उसके आँसूओं से मेरा दामन और मेरा मन  भीगने लगा बस एक ही विचार आ रहा था क्या वाकई सच कडवा होता है जिसे कोई नहीं सह सकता ? विला ने ठीक ही कहा उसने कभी झूठ नहीं कहा, किसी का बुरा नहीं चाहा फिर क्यों वह ऐसी गलती की सजा भुगत रही है जिसे उसने किया ही नहीं।  नहीं  विधाता इतना क्रूर और निर्दयी नहीं हो सकता ।....

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बेटी - सुकान्त साहू की उडिया कहानी

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नया घर - अशोक लव की हिंदी कहानी

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भीगता पानी - शैल अग्रवाल (ब्रिटेन से प्रवासी कथाकार)

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टैंकर - सूरज प्रकाश की हिंदी कहानी

 

लघुकथाएँ

प्रतिरोध - संजय कुमार

दो लघुकथाए - संजय पुरोहित

 

धारावाहिक उपन्यास

सीधे अंतरजाल पर प्रकाशित हिंदी का पहला उपन्यास

आधे चांद की रात (द्वितीय भाग )- एस. अहमद

उधर जिन्नाह के सामने सबसे बड़ा डर था कि अपर क्लास हिन्दुओं का देश की प्रभुसत्ता पर काबिज़ होना। वह अपने डर के कारणों को कई जगह खुलासा भी करते हैं। उनका मानना था कि अँग्रेज़ों के मुल्क से जाने के बाद मुसलमानों को दोयम दरज़े में रखा जाएगा।....

 

व्यंग्य

ँग्रेज़ों के खाने कमाने का दिन - अविनाश वाचस्पति

बेताल कथा - ज्ञान और शैतान की कहानी - गिरीश पंकज

 

 

मूल्याँकन

प्राचीन काल से मध्यकाल तक - आशा रानी व्‍होरा

न जाने कितनी पीढयों की गुलामी के बाद तथाकथित प्रेरणा का यह तिलिस्म टूटा पूरी तरह तो आज भी नहीं। अब भी साहित्य में उसे पुरुषों के आईनों में भिन्न-भिन्न रूपों में उतरना पडता है।  यों इधर कुछ वर्षों से स्थिति में खास बदलाव आया है। पर यह परिवर्तन अभीष्ट दिशाओं में भी है, ऐसा नहीं कहा जा सकता ।....

 

 

हिन्दी विश्व

विश्व-फ़लक पर हिन्दी: कुछ सुझाव - मंजु महिमा

बाजार की मार से बेज़ार हैं किताबें - संजय द्विवेदी

 

कृति-समीक्षा

शब्द संसार