vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। हलचल ।।

 

 

विश्व हिंदी न्यास का सातवाँ अधिवेशन संपन्न

अमेरिका "विश्व हिंदी न्यास" का सातवाँ अधिवेशन (6 एवं 7 अक्टूबर ) नये आयाम गढ़ते हुए संपन्न हुआ । अपने स्वागत संदेश में G.Thomas Stella ने संस्था द्वारा भारतीय पहचान और सांस्कृतिक एकता की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि "यही वह सभ्यता है जो वर्तमान पीढ़ी धरोहर के रूप में आने वाली पीढियों को दे सकती है"

 

श्रीमती रीनत संधू, consul(Education) इस दिन की खास मेहमान रहीं. अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व हिंदी न्यास द्वारा आयोजित अधिवेशन २००७ काबिले तारीफ़ है यह योगदान हिंदी-संस्कृति के प्रचार के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है "

 

कार्यक्रम का आरंभ हुआ अमरिका के  राष्ट्रीय गीत से जिसे स्वर दिया अशनी व शिवानी दवे ने हिंदुस्तानी राष्ट्रीय गीत "जन गण मन " को बाँसुरी पर बजाया निष्ठा सोब्रिन ने । 

 

बाल साहित्य गोष्ठी के अंतर्गत हर उम्र के बच्चों ने भाग लिया, जिसका विस्तार कहानी, बाल गीत, विश्व गीत और नाटक के साथ-साथ रोचक हकीकतों द्वारा देश की संस्कृति को बखूबी अपने मूल्यों के साथ प्रसारित किया। सीमा खुराना की प्रस्तुति को सभी ने मुक्तकंठ से सराही ।

 

इस अधिवेशन का खास आकर्षण था सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ जिसमें उड़ीसा के नृत्य, जगन्नाथ की रथ यात्रा का अद्भुत दृश्य , राजस्थानी विवाह, जिसमें उनकी रस्में भी शामिल थीं, तामिलनाडू के तीज त्यौहार की झलकियाँ, पंजाब के परिवारों का संगठन और एकता उनके नाच-गाने, आदि प्रमुख थी ।  बच्चों द्वारा प्रस्तुत  उड़ीसा की शादी के निबंध, बंगला देश की शादी का दृश्य, देश की महान हस्तियाँ की आदर्श भरी झलकियाँ,  "जलियनवाला बाग़" की अंधाधुंध गोलियों की बौछार का नमूना, भगतसिंह के " स्वतंत्रता संग्राम " के परिचय के साथ साथ उनका नारा " इन्कलाब जिंदाबाद "  आदि का भरपूर आनंद सभी श्रोताओं और दर्शकों ने उठाया ।  

(देवी नागरानी, अमेरिका से)

 ◙◙◙

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google