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वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

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।। हलचल ।।

 

 

चुनौती के बावजूद हिंदी का भविष्य उज्ज्वल

दिल्ली। अँग्रेज़ी से मिल रही ज़ोरदार चुनौती के बावजूद इंटरनेट पर तेज़ी से हो रहे हिंदी के फैलाव से उत्साहित साहित्यकारों, कवियों एवं पत्रकारों को यक़ीन है कि दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है ।

 

प्रवासी संसार एवं जय जयवंती द्वारा नई दिल्ली के इंडिया हैवीटेट सेंटर में पिछले सप्ताह हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी विषय पर आयोजित संगोष्ठी में यह तथ्य सामने उभरकर आये । हिंदी जगत में भाषा संबंधी सरोकारों पर गंभीर, सार्थक और व्यापक विमर्श की श्रृंखला की ये दूसरी कड़ी थी।

 

सांसद एवं दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जय प्रकाश अग्रवाल ने संगोष्ठी का शुभारंभ किया । इसमें प्रमुख साहित्यकारों, राजनेताओं, कवियों पत्रकारों एवं हिंदी प्रेमियों ने हिस्सा लिया । सासंद एवं कवि उदयप्रताप ने कहा कि हिंदी के विकास के लिए व्यावहारिक तरीका अपनाना होगा । कठिन हिंदी शब्दों का प्रयोग करने के बजाय दूसरी भाषा के सरल शब्दों को स्वीकारने में संकोच छोड़ना होगा । उन्होंने कहा कि रोजगार, न्याय एवं सरकारी कामकाज़ से अँग्रेज़ी को हटना चाहिए । भविष्य की हिंदी अलग होगी किन्तु उसका भविष्य उज्ज्वल है ।

 

गुरुगोविंद सिंह तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कंप्यूटर सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के.के. अग्रवाल ने कहा कि भाषा पर गर्व करने से हिंदी आगे बढ़ेगी । इसके  लिए अँग्रेज़ी की मानसिकता से बाहर निकलना होगा । उन्होने अनुवाद के बजाय मौलिकता पर काम नहीं होने पर चिंता व्यक्त की । जयजयवंती की ओर से रेल मंत्रालय के पूर्व निदेशक, राजभाषा, विजय कुमार मल्होत्रा ने इंटरनेट पर हिंदी भाषा को लेकर हो रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी । अशोक चक्रधर ने कहा कि कंप्यूटर ने भाषायी दूरी कम की है । उन्होंने अपने चुटकुले अंदाज़ में कार्यक्रम में हास्यकवियों को आमंत्रित करने के कारण भी बताये और अपनी हास्य कविताओं के ज़रिये कार्यक्रम में जीवंतता लाने का प्रयास किया। हिंदी के प्रमुख पोर्टल प्रभासाक्षी के संपादक बालेंदु दाधीच ने कहा कि इंटरनेट पर शुरुआती झटकों के बावजूद अब हिंदी का फैलाव तेज़ी से हो रहा है । एमएमएन, गूगल, याहू आदि पर हिंदी की उपस्थिति इसे प्रतिबिंबित कर रहा है । उन्होंने यह भी कहा कि छोटे शहरों की तरफ़ इंटरनेट ने तेज़ी से रूख़ किया है । जिससे और तेज़ी से हिंदी के फैलाव का मार्ग प्रशस्त हुआ है । हिंदी जाल स्थलों का निर्माण अब 10 मिनट में संभव है ।

 

संगोष्ठी के प्रारंभ में प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय ने इसके आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि ये सिललिसा आगे भी चलता रहेगा । उन्होंने संगोष्ठियों में आये अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया । संगोष्ठी में अन्य लोगों के अलावा केंद्रीय हिंदी समिति के सदस्य व प्रमुख पत्रकार राहुल देव, छत्तीसगढ़ से पत्रकार अशोक साहू, अमेठी से शिवमूर्ति शुक्ला आदि कई राज्यों के पत्रकार एवं हिंदी प्रेमियों ने भाग लिया ।

(अशोक साहू)

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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