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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। हलचल ।।

 

 देश-विदेश की सांस्कृतिक गतिविधियाँ

 

इंतिज़ार हुसैन को प्रेमचंद फैलोशिप

नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी द्वारा अकादेमी के पहले प्रेमचंद फैलोशिप प्राप्त करने वाले पाकिस्तान के प्रसिद्ध कथाकार इंतिज़ार हुसैन का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। अध्यक्षता करते हुए अकादेमी के अध्यक्ष गोपीचंद नारंग ने इंतिज़ार हुसैन की रचनाओं की चर्चा करते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए बधाई दी।

 

प्रेमचंद फैलोशिप प्राप्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हुसैन ने कहा कि इस सम्मान को पाना उनके लिए फख़्र की बात है। दक्षिण एशिया में हिंदुस्तान एक विशेष देश होने का गौरव हासिल करता है, जिसने देश के बाहर के किसी लेखक को प्रेमचंद जैसे कथाशिल्पी का फैलोशिप प्रदान किया है ।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस बात को लेकर बहस करते हैं कि गोदान पहले उर्दू में लिखा गया तो कुछ लोग हिंदी में । असल बात यह है कि प्रेमचंद ऐसे शख्स हैं, जिनके यहाँ हिंदी और उर्दू दोनों ही भाषाओं को जोड़ने का काम किया और कहानी की एक परंपरा कायम की ।

कार्यक्रम का संचालन वृजेन्द्र त्रिपाठी ने किया ।

 

मेरे युवजन, मेरे प्रियजन

नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि गजानन माधव मु्क्तिबोध की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित समारोह में मुक्तिबोध के पत्रों का अशोक वाजपेयी और मुक्तिबोध के पुत्र रमेश मुक्तिबोध द्वारा संपादित संकलन मेरे युवजन, मेरे प्रियजन का लोकार्पण वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण ने किया। समारोह के अध्यक्ष डॉ. नामवर सिंह ने संकलन को महत्त्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए कहा कि साहित्यिक चिंताओं से लैस इन पत्रों के माध्यम से 1936 से 1964 तक के दौर की साहित्यिक, राजनीतिक व सामाजिक घटनाओं पर नई रोशनी पड़ती है।

 

लक्ष्मीप्रसाद को पुश्किन सम्मान

नई दिल्ली। रूस की राजधानी मास्को स्थित भारत मित्र समाज द्वारा दिया जाने वाला पुश्किन सम्मान इस साल राज्यसभा के पूर्व सदस्य वाई लक्ष्मीप्रसाद को हिंदी तथा तेलुगु में उनके रचनात्मक लेखन के लिए दिया जा रहा है। प्रसाद को साहित्य अकादेमी और पद्मश्री सम्मान प्राप्त है। उनकी दस पुस्कतें हिंदी में और बाईस पुस्तकें में प्रकाशित हैं। यह सम्मान प्रतिवर्ष हिंदी के ऐसे लेखक को दिया जाता है, जिसने रचनात्मक लेखन और अंतर्राष्ट्रीय सूझबूझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।

 

योगेंद्र आहूजा को रमाकांत स्मृति कहानी पुरस्कार

नई दिल्ली। इस वर्ष का रमाकांत स्मृति कहानी परस्कार योगेंद्र आहूजा को उनकी कहानी स्त्री विमर्श के लिए प्रदान किया जाएगा। इस पुरस्कार को पाने वाले योगेंद्र आहूजा दसवें लेखक हैं। बदायूँ में जन्में बैंक कर्मचारी योगेंद्र आहूजा का एक एक कहानी-संग्रहअंधेर में हँसी प्रकाशित है।

 

प्रतीक मिश्र को बाल-साहित्य पुरस्कार

चंद्रपुर।महाराष्ट्र। हिंदी दिवस पर आयोजित समारोह में बाल-साहित्यकार डॉ.बानो सरताज द्वारा स्थापित डॉ. मैमूना ख़ातून शाह स्मृति बाल-साहित्य पुरस्कार अखिल भारतीय स्तर पर बाल-साहित्य के क्षेत्र में इस वर्ष का कानपुर के डॉ. प्रतीक मिश्र को उनकी कृतिअंत्याक्षरी गीत पर प्रदान किया गया ।

 

चार लेखक सम्मानित

नई दिल्ली। संसद के केंद्रीय कक्ष में संसदीय हिंदी परिषद के राष्ट्रभाषा दिवस समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने हिंदी के चार साहित्यकार- राजी सेठ, डॉ. परमानंद पांचाल, केवल गोस्वामी और डॉ. शकुंतला कालरा को सम्मानित किया । समारोह का संयोजन पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सरोजिनी महिषी ने किया तथा अध्यक्षता डॉ. गंगाप्रसाद विमल ने की ।

 

हनुमान चालीसा उर्दू में

वाराणसी। एक मुस्लिम छात्रा नाज़नीन ने हमुमान चालीसा का उर्दू में लिप्यंतरण किया है । महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्व-विद्यालय की मध्यकालीन इतिहास के स्नातक पाठ्यक्रम की छात्रा नाज़नीन का कहना है कि यह हनुमान भक्तों के लिए उर्दू लिपि में अपनी तरह की पहली किताब है ।

 

वाराणसी के एक बुनकर परिवार की एकमात्र पढ़ी-लिखी नाज़नीन हनुमान भक्ति के प्रति समर्पित अकेली मुस्लिम लड़की नहीं है, बल्कि उसकी सहपाठी रेशमीना, परवीन, नज़मा और फ़रजाना भी उसके साथ हैं, जो हनुमान चालीसा का भी नियमित पाठ करती हैं । गत वर्ष मार्च में यहाँ के संकटमोचन मंदिर में हुए बम विस्फोट के बाद उनमें हनुमान के प्रति आस्था पैदा हुई और उन्होंने अगले दिन मंदिर में हनमान चालीसा का पाठ किया ।

 

पाँच हजार किताबों का अरबी में अनुवाद होगा

आबूधाबी। अरब देशों में भारतीय लेखकों को बड़े ही चाव से पढ़ा जाता है, लेकिन हिंदी साहित्य का बहुत ज्यादा अनुवाद उर्दू या अरबी में नहीं हुआ है, जिस व़जह से वहाँ के पाठक चाहकर भी भारतीय साहित्य को नहीं पढ़ पाते हैं । भारतीय साहित्य  के प्रति पाठकों की रुचि को देखते हुए आबूधाबी अंतर्राष्टीय पुस्तक मेले के आयोजकों ने पहले चरण में भारतीय भाषाओं की पाँच हजार पुस्तकों का अनुवाद अरबी भाषा में कराने की योजना बनाई है । आबूधाबी में अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन अगले वर्ष मार्च में किया जा रहा है । आयोजकों ने इसके साथ ही साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन वाले लेखकों, अनुवादकों एवं प्रकाशकों को सम्मानित करने की भी योजना बनाई है ।

 

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद राष्ट्रीय सम्मान-2007-08

भोपाल। स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों, राष्ट्रभक्ति और समाज-सेवा के सर्वोत्कृष्ट मानदंडों की स्थापना के लिए उच्चकोटि के रचनामक अवदान, सृजनात्मक शोधकार्य और विशिष्ट उपलब्धियों के सम्मानार्थ संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2006 से स्थापित उच्चकोटि के समग्र रचनात्मक अवदान के लिए प्रतिवर्ष किसी एक व्यक्ति अथवा संस्था को रुपये 150,000/- (डेढ़ लाख), प्रशस्ति एवं सम्मान पट्टिका से अलंकृत किया जाता है । देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, पत्रकारों एवं विशेषज्ञों से सम्मान के लिए अनुशंसाएँ आमंत्रित हैं, जो संचालक, स्वराज संस्थान संचालनालय, रवीन्द्र भवन परिसर, भोपाल-462002,को भेजी जाएँ । फैक्स नं. 0755-2661926, दूरभाष : 2660407,2660563 ई-मेल से swartajbpi @ bataone.in

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अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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