vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। नवगीत ।।

 
 

सबके आँगन एक अखाड़ा

 

पुरवा पथ से

पहिये रथ के-

मोड़ रहा है गाँव

 

पूरे घर में

ईटें-पत्थर

छानी-छप्पर

       छोड़ रहा है गाँव

 

ढीले होते

कसते-कसते

पक्के घर में

कच्चे रिश्ते

       जोड़ रहा है गाँव

 

इसको उससे

उसको इससे

और न जाने

किनको किससे

       तोड़ रहा है गाँव

 

गरमी हो बरखा

या जाड़ा

सबके आँगन

एक अखाड़ा

       गोड़ रहा है गाँव

  डॉ.शिव बहादुर सिंह भदौरिया

साकेत नगर, लालगंज

रायबरेली, उत्तरप्रदेश

◙◙◙

 

छांदस रचनाएं

गीत

डॉ.रामदरश मिश्र

नवगीत

छविनाथ मिश्र

डॉ. शिव बहादुर भदोरिया

डॉ. किशोर काबरा

ग़ज़ल

अक्षय गोजा

सजीवन मंयक

दोहे

डॉ. रामनिवास मानव

 

 

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google