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वातावरण बीमार है
एक भी खिड़की नहीं चारों तरफ दीवार है ।
घुट रहा है दम यहाँ, वातावरण बीमार है ।।
एक लंगड़ा आदमी जैसे घिसटकर चल रहा
ठीक ही वैसे हमारे व़क्त की रफ़्तार है ।
अपना चेहरा आईने
में देखकर कहने लगे
हम तो ऐसे हैं नहीं
यह आईना बेकार है ।
ज़िंदगी के बाद
रिश्ते शुरू होते हैं यहाँ
शव को कंधा लगा
देना एक शिष्टाचार है ।
उस सड़क पर भीड़
ज़्यादा बढ़ गई है आजकल
चल रहा है जिस जगह
पर मौत का व्यापार है ।
हमने जो भी कुएँ
खुदवाये सभी सूखे रहे
लोग कहते हैं कोई
चट्टान पानीदार है ।
सजीवन मयंक
251-
शनिचरा वार्ड - 1,
नरसिंह गली
होशंगाबाद,
मध्यप्रदेश |