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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। गीत ।।

 

 

दीपक नया तलाश करें

 

सुंदर-सुंदर स्थल पृथ्वी पर रोज़ तलाश करें

उससे पहले लेकिन सुंदर अपनी आँख करें

 

मन कहीं न लग पाए तो कुदरत का आश्रय लें

वह भी हो क्रोधित तो ख़ुद को ही ख़ुशगवार करें

 

पार करें लक्ष्मण रेखा तो मृग मरीचिका है

जो कुछ मिलता जीवन में, उस पर ही ध्यान करें

 

इतने ख़ुश क्यों हो, लौ बुझते दीये की है

तम से जो बचना हो, दीपक नया तलाश करें

 

ये फूल-हवा, ये नदियाँ-पर्वत, ये नज्ज़ारे

चिल्ला कर कहते हैं, आओ, पूजा साथ करें ।

  अक्षय गोजा

चाँदपोल गेट के पास

जोधपुर, राजस्थान - 342001

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छांदस रचनाएं

गीत

डॉ.रामदरश मिश्र

नवगीत

छविनाथ मिश्र

डॉ. शिव बहादुर भदोरिया

डॉ. किशोर काबरा

ग़ज़ल

अक्षय गोजा

सजीवन मंयक

दोहे

डॉ. रामनिवास मानव

 

 

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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