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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail।com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। भाषांतर ।।

 

 

ईश्वर से मुखामुखी
(ईरानी कविता)


मेरी चमकती आंखों से दूसरी पर भाग जाने कि आतुरता
छीन कर
उन्हें सिखालाओ पर्दा करना
उन चमकीली आंखों से

हे ईश्वर
हे ईश्वर अपनी सूरत दिखलाओ
और बीन लो मेरे ह्रदय से स्वार्थ और पाप के ये कण

मत करो बर्दाश्त एक तुच्छ बांदी का विद्रोह
और दूसरे मे शरण की याचना

सुन लो मेरी गुहार
ओ समर्थ बिरले देवता !


मूल - फ़रूग फ़रूखजाद
अनुवाद - राजुला शाह

 ◙◙◙

 

कवि

फ़रूग फ़रूखजाद (ईरान)

कुसुमाग्रज (मराठी)

ग्रेस (मराठी)

रोबर्तो हुआरोज़  (अर्जेंटीना)

 

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ।बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ।सुधीर शर्मा, डॉ।जे।आर।सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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