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फिजी का मामला फिर गरमाया
रोहित कुमार ‘हैप्पी’
आजकल
क्रिसमिस की चहल-पहल है। गरमी का मौसम शुरू हो गया है। यहाँ
सर्दी व गरमी भारत से ठीक विपरीत समय में होती है। भारत में
सर्दी आरम्भ हुई है और अपने यहाँ गरमी!
अधिकतर काम-धंधे दिसम्बर के आरम्भ में बंद हो जायेंगे और लोग
एक-डेढ महीने छुट्टियों के मूड में रहेंगे। छुट्टियां होने
वाली हैं किंतु छुट्टियों से एक दम पहले का यह समय अत्याधिक
व्यस्त रहता है। सभी को छुट्टियों से पहले अपने-अपने काम
निबटाने के साथ-साथ नये वर्ष की तैयारी भी करनी होती है।
इन दिनों अपने बल्लू खान का मामला बहुत गरमाया हुआ है। जहाँ
दो-चार अपने लोगों की बैठक हुई कि बल्लू खान की चर्चा शुरू! अब
आप कहेंगे कि यह बल्लू खान हैं कौन? बल्लू खान फिजी से सम्बंध
रखने वाले भारतीय मूल के न्यूजीलैंड के नागरिक हैं। ये
न्यूजीलैंड के रहने वाले हैं और इन दिनों फिजी में इनपर फिजी
के प्रधानमंत्री बैनीमरामा की हत्या के षड्यंत्र का मामला चल
रहा है।
आज मैं अपने एक फिजी भारतीय मित्र के यहाँ गया तो दो-चार और
लोग भी मिले और वहां भी यही चर्चा गर्म थी।
‘कुछ
ना कुछ बात ज़रूर रही होगी। बिना वजह भला आर्मी उन्हें ही
क्यों पकड़ती?’
‘अब
तो बुरे फंस गये बल्लू खान।‘
‘भला
बल्लू खान बैनीमरामा को मारने की क्यों सोचते?’
मैं बड़ा उत्सुक था।
‘अरे
भाई साहब, बिजनैसमैन है, पहली सरकार में इनकी कम्पनी को कईं
कोंट्रेक्ट दे रखे थे। बैनीमरामा की सरकार ने सब बंद कर दिया,
बस....!’
अब इन बातों में कितना दम है तो मालूम नहीं हां, बल्लू खान की
हालत फिजी में बहुत खराब बताई जा रही है।
बल्लू खान से सैनिकों ने हिरासत के दौरान काफी मारपीट की जिसके
फलस्वरूप उन्हें गंभीर शारीरिक व मानसिक यातना से गुजरना पड़ा।
बल्लू खान ने फिजी सरकार पर अपने न्यूज़ीलैंड के वकील के जरिए
40 मिलियन फिजियन डालर का दावा किया है।
’यह
अकेले बल्लू खान का नहीं, कई लोगों का काम है। सेना वैसे ही
किसी को नहीं पकड़ लेती। मैं खुद सेना में रहा हूँ।‘
अच्छी कद-काठी वाले एक फिजी भारतीय ने कहा।
‘आप
फौज मे थे? मैं सोचता था कि फिजी में भारतीय फौज में भरती नहीं
होते?’
‘नहीं
ऐसी बात नहीं है। वैसे ही अपने भाई-लोग फ़ौज की नौकरी को कुछ
खास नहीं चाहते और पैसा भी उतना नहीं है।‘
मैं सोचता था कि शायद भारतीय फौज में भर्ती ही नहीं हो सकते
लेकिन फौजी भाई ने मेरी गलतफहमी दूर कर दी थी।
फिजी के प्रधानमंत्री कोमोडोर फ्रैंक
बैनीमरामा की हत्या की साजिश के सिलसिले में बल्लू खान को
मुख्य अभियुक्त बनाया गया है व इसके अतिरिक्त सेना एवं गुप्तचर
सेवाओं के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों व एक पूर्व राजनीतिज्ञ सहित
दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फ्रैंक
बैनीमरामा की हत्या की साजिश के सिलसिले में कुल
17
लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इन
पर देशद्रोह, विद्रोह भड़काने तथा हत्या की
साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इन अभियुक्तों में थल सेना
के कमांडर कर्नल जोन
बालेड्रोकाड्रोका भी सम्मिलित हैं।
बातों का सिलसिला फिजी से हटा तो आस्ट्रेलिया के चुनावों की
चर्चा होने लगी। काफी समय तक जॉन हावर्ड के सत्ता में रहने के
बाद अब जनता बदलाव चाहती थी और बस वहां यही हुआ। अगले साल
न्यूज़ीलैंड में भी चुनाव सिर पर है।
‘यहाँ
भी लेबर पार्टी को बहुत समय हो गया है, शायद यहाँ भी अब की
नेशनल सत्ता में आयेगी।‘
सभी इस बात पर लगभग सहमत थे। बदलाव शायद मनुष्य की आवश्यकता है
और आदत भी। हमें भी यहाँ बैठक लगाए काफी समय हो गया था।
‘जी,
चलें क्या? रास्ते में शॉपिंग भी करनी है!’
‘अच्छा,
राम-राम, भईया!’
‘हां,
राम-राम!’
एक साथ कई लोगों का उत्तर मिलता है।
अपने भारत से आये भारतीयों के सिर पर अँग्रेजी चाहे जितनी मरजी
सिर चढ़ कर क्यों न बोलती हो पर अपने फिजी के भाई-बहन आज भी
‘राम-राम’
वाली परम्परा जारी रखे हुए हैं।
रोहित कुमार ‘हैप्पी’
संपादक, भारत-दर्शन
न्यूज़ीलैंड
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