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इस चक्रव्यूह में
यह मेरे जमे रहने का समय है
या अनायास बिखर जाने का
ठहरे हुए
दुख को देखने का
या सुख के
च्रकव्यूह में भटकने का।
कुछ ऐसा ही रहा
प्रयास करने पर नहीं मिला जो
न चाहने पर
देहरी लाँघ सामने आ खडा हुआ।
इन्हीं हर रोज़ के
चाँद सितारों की बात है
किसी नये अविष्कार की तह में
अभी नहीं उतरी हूँ।
मिट्टी के रंग से ही
पहचान पाती हूं
अपनें होने के रंग को
सार्थक परिभाषा।
जीवन के इस
चक्रव्यूह में
मेरा लगातार घुमते रहना तय हैं।
विपिन चौधरी
मकान नः
१००८
हाउसिंग बोड
कलोनी,
सेक्टर १५
ए,
हिसार,
हरियाणा - १२५००१
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