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सृजनगाथा
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वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007
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।। कविता ।।
पहाडों पर बारिश
पहाड़ों पर बारिश
ऐसे होती है
जैसे किसी लाड़ली की
उसके बाबुल के घर से
बिदाई
दहाड़ती
पेड़ों को पछाड़ती
पहाड़ी हवा
और पीटती बारिश
जैसे नगाड़ों पर बूंदें
नृत्य कर रही हो
सीमा सोनी
27/622, इंदिरा भवन, न्यू शांति नगर
रायपुर, छत्तीसगढ़, 492007
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ककविताएँ
त्रिलोचन
नीलाभ
कुमार अंबुज
विश्वरंजन
प्रो.भागवत प्रसाद 'नियाज'
- पहाड़ों पर बारिश
- आज की रात
- तोता सीख गया है...
- छुई-मुई
- सज़ा
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