|
डॉ. बलदेव की ग्यारह
कहानियाँ
राजा साहब
खास
उम्मीदवार के लिए एक दल, दूसरे दल के लिए एक एक की जगह दो दो
सीट छोड़ने को तैयार हो जाता है। इसके लिए वह कमजोर व्यक्ति को
डमी के रूप में खड़ा कर देते हैं। चुनाव या सरकार बनाने के समय
कुछ इस तरह के गोपनीय समझौते करने होते हैं। ये उच्चस्तरीय
होते हैं। डमी को इसका पता नहीं रहता। वह बड़े उत्साह मे खर्च
करता है। आम जनता इसे नहीं समझ पाती। इसीलिए वह बार बार धोखा
खाती है। जातिगत समीकरण के चलते मूर्ख से मूर्ख को टिकिट देनी
पड़ती है।
इस बार राजघराने के दो शूरवीर मामा और
भांजा चुनाव मैदान में हैं। काँटे की टक्कर है। गाँव में धूल
उड़ने लगी है जीप और कारों की धूल आसमान को बदरंग कर रहा है।
इस चुनाव में आपसी स्वार्थ टकराने लगे है। भाई-भाई का दुश्मन
चुनाव प्रचार में हैं। चाचा भतीजे खून के प्यासे बने हुए हैं ।
गली-खोर में मुड़ी-झंडी फरफरा रहे हैं। तिराहे-चौराहे पर
नेताओं के कट आउट लगे हुए हैं। .....मुर्गे और बकरे ऊंचे दामों
पर कट रहे है। दारू बोतलों में नहीं हंड़ियों में बाँटे जा रहे
हैं। शीर्ष नेताओं के आने की ख़बर है। लाउडस्पीकर से एक दूसरे
को काटती कन फोड़वा आवाज़ें उठ रही थीं।
चुनाव-प्रचार का अन्तिम दौर है। राजा
साहब गाजे-बाजे फौज फट्टके के साथ सुबह ही अपने प्रचार में
निकल पड़े हैं। चार-पाँच गाँवों के बीच लम्बा-चौड़ा मैदान है।
भारी संख्या में लोग इक्ट्ठे हुए हैं । राजा साहब की बस्ती से
इंतजार है। दूर से धूल उड़ती दिखाई दी। छोटे-बड़े बच्चे हाथों
में झंडियाँ लिए जय जयकार करते उधर ही दौड़े। मंच के पीछे कार
रूकी, जीपों का काफिला रूका। ऊँचे और विशाल मंच पर राजा साहब
दूसरे सूर्य से प्रकट हुए। तालियों की गड़गड़ाहट हुई। आस्वस्ति
में हाथ उठे । हर कहीं खामोशी। शान्त वातावरण । राजा साहब को
मालाओं से लाद दिया गया। भांजे की भारी-भरकम सभा देख, मामा
साहब का काफिला पीछे लौट गया। कुछ लोग उधर ही दौड़े पर राजा
साहब हताश नहीं हुए । उनका भाषण शुरू हुआ। मेरी प्यारी जनता।
मैं आपको जी जान से प्यार करता हूँ । आप लोगों के दुख से मैं
हैरान हूँ। आप लोगों के उद्धार के लिए ही मैं खड़ा हूँ। खड़ा
क्या हुआ हूँ खड़ा कराया गया हूँ । आपने पिछले शासन में हमारे
मामा साहब को मंत्री के रूप में देखा । उन्हें तीन-तीन बार
जिताया । लेकिन आप लोगों का क्या भला हुआ । क्षेत्र का क्या
विकास हुआ
?
ऐसे निकम्मे मामा को इस बार हराना है। जोरदार तालियों की
गड़गड़ाहट हुई। मेरा मामा कंस है। वह ऐय्याश नम्बर वन है,
भाईयों वह दिन रात रंडी और भड़वों से घिरा रहता है। इस
हरामजादे को पिछले चुनाव में बुथ केप्चर कर मैंने ही जिताया
था। लेकिन नीचता की भी हद होती है। यह मेरे ही खिलाफ चुनाव में
खड़ा है।इसलिए आप लोगों से गुजारिश है इस हराम खोर को आप एक भी
वोट मत दें। चुनाव के बाद मैं इसें सरे आम कोड़े लगवाऊँगा, देख
लेना मेरी प्रजाजनों, आप को आगे मेरा खवास कुछ जरूरी बात
बतावेगा। इतना कहकर राजा साहब ऊँची कुर्सी पर बैठ गए।
अब खवास साहब माईक के सामने खड़े हुए ।
चूडीदार पाजामा, शेरवानी और टोपी में खवास साहब मुन्नीबाई के
तबलची जैसा दिख रहे थे। उन्होंने माइक पकड़ते ही राजा साहब की
तीन-तीन बार जय बोलाई। जय जयकार और लुभावने नारों से गगन मंडल
गुंजायमान हो गया अब उसने बोलना शुरू किया- भाइयों, हमारे राजा
साहब महान उपकारी है, ....धार्मिक हैं। दुर्गा माता को
इन्होंने एक हजार बकरे का बदना दिया है। ये जीतेंगे ही। और आप
देखना अगला मुख्यमंत्री ये ही होंगे। दूसरी ओर इनके मामा साहब
को देखिए । वास्तव में वे कंस मामा है। कंस मामा क्या साला
रावन है। रावन शब्द सुनते ही राजा साहब की भवें तनी । मामा को
इस बार राजा साहब धूल चटा देगें। तालियों की फिर गड़गड़ाहट
हुई। खवास साहब और उत्साहित हुए बोले मामा हराम खोर है, और नीच
कोम है। भाइयों......खवास कुछ आगे बोलता कि राजा साहब तनतना कर
उठे गर्दन पकड़ी और जूते उतार कर सात-आठ जूते गिन दिए। तालियाँ
फिर बजी। इस बार जब तक बजती रही जब तक भीड़ तितर-बितर न हुई ।
क्या जाने राजा साहब किसके छत ऊपर बदूंक तान दें। जान सबको
प्यारी होती है। राजा साहब का मूड़ ऑफ हो गया। मार खाने के बाद
भी खवास साहब विचलित नहीं हुए। उल्टे उत्साह से ड्राइव्हर की
बगल में बैठ गए। अब का काफिला आगे बढ़ा ।
रास्ते में घनघोर जंगल पड़ा । शेर-चीते
बाघ-भालुओं से भरा जंगल। राजा साहब का सहसा ही आदेश हुआ।
“रोको”
कार रुक गयी। जीप का काफिला रूका। बोले- इस साले को
....गरदनिया देकर उतारो । ड्राइव्हर ने वैसा ही किया और कार
आगे बढ़ गयी, खवास साहब गिड़गिड़ाते रहे, किसी भी को दया नहीं
आई। काफ़िला उसके ऊपर ढ़ेर सा गर्द उड़ाता अदृश्य हो गया।
डॉ. बलदेव
स्टेडियम के पीछे, रायगढ़,
छत्तीसगढ़
◙◙◙
|