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राजभाषा
छत्तीसगढ़ी के लिए संघर्ष
अभी
प्रारंभ हुआ है-पवन दीवान
रायपुर।
राजभाषा छत्तीसगढ़ी के विधेयक विधानसाभा में आने और इसके लिए
निरंतर संघर्ष करने वाले साहित्यकारों, समाजसेवियों आदि का
सम्मान प्रेस क्लब में किया गया, छत्तीसगढ़ के अनेक संगठनों ने
मिलकर राजभाषा आंदोलन के नेतृत्वकर्ता विधायक भूपेश बघेल का
अभिनंदन किया। वहीं छत्तीसगढ़ के छत्तीस रत्नों के रूप में
साहित्यकार एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का सम्मान
हुआ। इस मंच से मुख्य अतिथि पवन दीवान ने कहा कि छत्तीसगढ़ी के
लिए संघर्ष करने का समय अब प्रारंभ हो रहा है और इसके
आत्मसम्मान के लिए प्राणों का न्यौछावर भी कम है। हम सबको
मिलकर छत्तीसगढ़ी के हक की लड़ाई लड़नी होगी।
छत्तीसगढ़ी एवं आदिवासी भाषा संस्कृति विकास संस्थान, अगासदिया
आदि के संयुक्त संजोजन में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ी को
राजभाषा बनाए जाने के क्षण को राज्य के निवासियों के लिए
ऐतिहासिक बताया गया। समारोह के प्रारंभ में विख्यात पंडवानी
गायिका उषाबाई बारले का पंडवानी गायन एवं रमेश ठाकुर एवं
साथियों द्वारा गायन हुआ। अहफाज रशीद निर्मित हमर छत्तीसगढ़ का
प्रदर्शन भी किया गया। जनकवि लक्ष्मण मस्तुरिया के ओजस्वी
गीतों से सम्मान सत्र प्रारंभ हुआ संचालक डॉ. सुधीर शर्मा ने
आयोजन एवं आंदोलन के बारे में जानकारी दी वहीं अगास दिया के
संपादक डॉ। परदेशीराम वर्मा ने स्वागत भाषण दिया। सबसे पहले
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कवि संत पवन दीवान को अभिनंदन किया गया।
तत्पश्चात श्री भूपेश बघेल का अभिनंदन संत पवन दीवान, महंत
राजेश्री रामसुंदर दास सहित दो दरजन से अधिक संगठनों ने किया।
श्री बघेल को पगड़ी बाँधकर भविष्य के आंदोलन की जिम्मेदारी दी
गई। साथ ही पद्मश्री डॉ. महादेव प्रसाद पांडेय को भी पगड़ी
बांधकर सम्मानित किया गया। विधायक चेतन वर्मा, डॉ. सियाराम
साहू का स्वागत हुआ।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले
सर्वश्री चंद्रशेखर साहू, श्याम बैस, रमेश नैयर, डॉ. बलदेव,
डॉ. बिहारीलाल साहू, नंदकिशोर तिवारी, जागेश्वर प्रसाद,
रामेश्वर वैष्णव, डॉ. चित्तरंजन कर, प्रभुलाल मिश्र, सुरजीत
नवदीप, विनोद जैन, अश्विनी केशरवानी, एन.के. वर्मा, प्रशांत
रथ, जयप्रकाश शर्मा ललित मिश्रा, डॉ. ऋषिराज पांडेय,
लालरामकुमार सिंह, हसन खान, पारसनाथ देवांगन, डॉ.जे.आर.सोनी,
शकुंतना तरार, अमृता शर्मा, डॉ.व्यासनारायण दुबे आदि का
छत्तीसगढ़ी रत्न से अभिनंदन किया गया। अतिथियों ने डॉ. सुधीर
शर्मा संपादित राजभाषा छत्तीसगढ़ी-संघर्ष के संगवारी तथा सुधा
वर्मा लिखित बन के चंदैनी एवं डॉ. राजेन्द्र सोनी की पत्रिका
पहचान यात्रा के अंक का लोकार्पण किया। डॉ.चित्तरंजनकर ने आभार
प्रदर्शन किया। उक्त अवसर पर राजभाषा छत्तीसगढ़ी मंच के प्रमुख
प्रवक्ता नंदकिशोर शुक्ला व
संचालक मंडल के सदस्य जयप्रकाश मानस सहित बड़ी संख्या में प्रदेश
भर से पधारे बुद्धिजीवी, साहित्यकार, भाषासेवी उपस्थित थे ।
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