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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007

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।। हलचल ।।

 

  

प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ने किया महाकवि कालिदास के ग्रंथों का पद्यानुवाद

       मण्डलामध्यप्रदेश। भारतीय संस्कृति में आत्म प्रशंसा को शालीनता के विपरीत आचरण माना गया है, यही कारण है कि जहाँ विदेशी लेखकों के आत्म परिचय सहज सुलभ हैं,वहीं कवि कुल शिरोमणी महाकवि कालिदास जैसे भारतीय मनीषियों के ग्रंथ तो सुलभ हैं किन्तु इनकी जीवनी दुर्लभ हैं !  महाकवि कालिदास की विश्व प्रसिद्ध कृतियों मेघदूतम्, रघुवंशम्, कुमारसंभवम्, अभिग्ज्ञानशाकुन्तलम् आदि ग्रंथों में संस्कृत न जानने वाले पाठको की भी गहन रुचि है ! ऐसे पाठक अनुवाद पढ़कर ही इन महान ग्रंथों को समझने का प्रयत्न करते हैं। किन्तु अनुवाद की सीमायें होती हैं ! अनुवाद में काव्य का शिल्प सौन्दर्य नष्ट हो जाता है ! ई बुक्स के इस समय में भी प्रकाशित पुस्तकों को पढ़ने का आनंद अलग ही है !  

 

मण्डला के प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी ने  महाकवि कालीदास कृत मेघदूतम् के समस्त १२१ मूल संस्कृत श्लोकों का एवं रघुवंश के सभी १९ सर्गों के लगभग १७०० मूल संस्कृत श्लोकों का श्लोकशः हिन्दी गेय छंदबद्ध पद्यानुवाद कर हिन्दी के पाठको के लिये अद्वितीय कार्य किया है ! उदाहरण स्वरूप मेघदूतम् हिन्दी पद्यानुवाद से एक श्लोक मूल संस्कृत श्लोकः-


कस्यात्यन्तं सुखमुपगतं दुःखमेकान्ततोवा
नीचैर्गच्छिति उपरिचदशा चक्रमिक्रमेण ॥
हिन्दी अनुवाद
किसको मिला सुख सदा या भला दुःख
दिवस रात इनके चरण चूमते हैं
सदा चक्र की परिधि की भाँति क्रमशः
जगत में ये दोनों रहे

 
महाकवि कालीदास कृत रघुवंशम् का श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव समस्त १९ सर्ग लगभग ४०० पृष्ठ लगभग १७०० श्लोक हेतु उन्हें प्रकाशक चाहिए । शासन हर वर्ष कालिदास समारोह के नाम पर करोडों रूपये व्यय कर रहा है ! जनहित में इन अप्रतिम कृतियों को आम आदमी के लिये संस्कृत में रुचि पैदा करने हेतु सी डी में तैयार इन पुस्तकों को इलेक्र्टानिक माध्यमों से दिखाया जाना चाहिये ! जिससे यह विश्व स्तरीय कार्य समुचित सराहना पा सकेगा ! उनका पता है - प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव, c 6 mpseb colony rampur Jabalpur म.प्र. भारत पिन 482008, फोन 07612702081, मोबाइल- 91-94251-63952
, e mail vivek1959@sify.com

(विवेक रंजन श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
 

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