vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 

 

पूर्वा पर

 

लोहे से झल गई सलाखें

पिघल गये घेरे बाँहों के ।

 

परत-दर-परत चढ़ते साये

कपड़ों भर तनी अर्गनी

नाप गई अमरूदी कोण

टूटी मुंडेर टिकी कोहनी

 

धूप-चाँदनी तो वक्तव्य हुए झूठे

छत की ख़ामोश सभाओं के ।

 

रेंग-रेंग जाती है कातर

फाइलों लदे हाथों पर

रहा सिर्फ़ इंतज़ार बस का

जल डूबे फुटपाथों पर

 

हर तो हैं कैद कतारों मे

बागी हैं पुरवा के झोंके ।

 

   सोम ठाकुर

26/73, अहीर पाड़ा, राज की मंडी

आगरा, उत्तरप्रदेश – 282002

 ◙◙◙

 

 छंदकार

माह के छंदकार

राज मलकापुरी

- सच बोलने का तज़ुर्बा

- प्यार जताने को ग़ज़ल कहता हूँ

- पेड़ साया ज़ुदा नहीं करते

- हम तो शायर हैं

- करो वक़्त का इलाज़

नवगीत

सोम ठाकुर

महेश संतोषी

श्यामलाल शमी

डॉ. यथोधरा राठौर

यश मालवीय

दोहा

अरुण मित्तल 'अद्भुत'

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google