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पेड़
साया ज़ुदा नहीं करते
हुसन वाले वफ़ा नहीं करते ।
दर्द देकर दवा नहीं करते ।
उनपे रहमत ख़ुदा की होती है
जो किसी का बुरा नहीं करते ।
जर्ब लगती है बारहा लेकिन
दिल के टुकड़े हवा नहीं करते ।
हादसों से हयात मिलती है
हादसों से मरा नहीं करते ।
ये मैकदे का निज़ाम है साक़ी
लुत्फ़ को बे मज़ा नहीं करते ।
बारहा कौन तुम को समझाये
पेड़ साये ज़ुदा नहीं करते ।
‘राज’
वो हो तो कोई बात करें
आज कल वो मिला नहीं करते ।
राज
मलकापुरी
तारिक मंज़िल, मीनार आर्ट
ओम नगर, जरहाभाटा, बिलासपुर
छत्तीसगढ़
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495001
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