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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 

 

 पेड़ साया ज़ुदा नहीं करते

 

हुसन वाले वफ़ा नहीं करते ।

दर्द देकर दवा नहीं करते ।

 

उनपे रहमत ख़ुदा की होती है

जो किसी का बुरा नहीं करते ।

 

जर्ब लगती है बारहा लेकिन

दिल के टुकड़े हवा नहीं करते ।

 

हादसों से हयात मिलती है

हादसों से मरा नहीं करते ।

 

ये मैकदे का निज़ाम है साक़ी

लुत्फ़ को बे मज़ा नहीं करते ।

 

बारहा कौन तुम को समझाये

पेड़ साये ज़ुदा नहीं करते ।

 

राज वो हो तो कोई बात करें

आज कल वो मिला नहीं करते ।

   राज मलकापुरी

तारिक मंज़िल, मीनार आर्ट

ओम नगर, जरहाभाटा, बिलासपुर

छत्तीसगढ़ 495001

 ◙◙◙

 

 छंदकार

माह के छंदकार

राज मलकापुरी

- सच बोलने का तज़ुर्बा

- प्यार जताने को ग़ज़ल कहता हूँ

- पेड़ साया ज़ुदा नहीं करते

- हम तो शायर हैं

- करो वक़्त का इलाज़

नवगीत

सोम ठाकुर

महेश संतोषी

श्यामलाल शमी

डॉ. यथोधरा राठौर

यश मालवीय

दोहा

अरुण मित्तल 'अद्भुत'

 

 

 

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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