|
सच बोलने
का तज़ुर्बा
बारे में मेरे बोल के रुसवा न कीजिए ।
रिश्तों के इस लिबास को मैला न कीजिए ।
इस दौर में तो झूठ का बाज़ार गर्म है
सच बोलने का आप तज़ुर्बा न कीजिए ।
घर जल रहा था तब तो बुझाने न आए आप
अब राख को बुझा के तमाशा न कीजिए ।
क़ीमत चुका सकूँगा न मैं वक़्त की हुज़ूर
बारे में देर तक मेरे सोचा न कीजिए ।
बर्बादियों का
‘राज’
की जब ज़िक्र चल पड़े
पोंछा जबीं से अपनी पसीना न कीजिए ।
राज
मलकापुरी
तारिक मंज़िल, मीनार आर्ट
ओम नगर, जरहाभाटा, बिलासपुर
छत्तीसगढ़
–
495001
◙◙◙
|