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दोहे
प्यार भरे
सरल,
सरस,
सुन्दर,
सहज,
जीवन का आनन्द।
प्यार तुम्हारा यूँ
बसा,
ज्यों गुलशन में गंध
।
ना नज़रों
ने कुछ कहा,
नहीं लबों का साथ।
फिर जाने हम किस तरह,
समझ गए हर बात।
दिल तुझ तक ले जा रहा,
मुझको हर पल खींच।
तडपाएगा कब तलक,
परदा अपने बीच।
पहले सिमटी दूरियाँ,
उपजा फिर विश्वास।
मुझको तुझमें मिल गया,
अपना सा अहसास।
इक दूजे का हम अगर,
बन जाएँ
आधार।
हर मौसम मधुमास हों,
हरसूं उठें बहार।
बदली सारी चाहतें,
बदल गया व्यवहार।
डूबा तेरे प्यार में,
भूला सब संसार।
तू भीतर की रोशनी,
तू आँगन
की धूप।
दिखता है हर रूप में,
मुझको तेरा रूप।
यादों की परिकल्पना,
वादों का संसार।
अनुपम है ये साधना,
अद्भुत है ये प्यार।
अरुण मित्तल
'अद्भुत'
हरियाणा टिम्बर स्टोर
काठ मण्डी,
चरखी दादरी
भिवानी, हरियाणा
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