विश्वरंजन की तीन कविताएँ
बड़ा स्वप्न
वह कहता है बड़े स्वप्न देखो
चार आने में तो आज
मूँगफली भी नहीं मिलती
सौ रुपए में तो लड़की बेज दी जाती है
हम एक लड़की से भी बड़ा स्वप्न देखेंगे
एक भरी पूरी औरत का स्वप्न
उसके अधिकारों का स्वप्न
उसकी अस्मिता का स्वप्न
और रोज़ अल-सुबह
बेच आयेंगे इन स्वप्नों को
हकीकतों की मंडी में
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