पहाड़ की चार कविताएँ
पहाड़
पहाड़ तुमसे मिले मुझे
ऊँचाइयाँ, पहाड़
तुमसे मिले मुझे विशाल हृदय
पहाड़
तुम पर उगी तमाम वनस्पतियाँ
सबका जीवन चंगा करें
तुम पर फैली हरीतिमा
मन में जगाए रखे
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खिलने-फूलने की प्रक्रिया सदा
पहाड़ तेरे चरणों में बहता निर्मल जल धो दे मन की मैल सारी।
पहाड़ तुझसे मिले मुझे अविचल खड़े रहने का हौसला कठोर निर्णय लेने का संकल्प मानवता के लिए मर-मिटने का बल।
पहाड़ तेरे कन्धों पर झुके बादल जल से लबालब भरे है जो मेरी तपती रेगिस्तानी रूह को तृप्त करेंगे सीचेंगे इसकी उर्वरता
पहाड़ तुम हमेशा मेरे जीवन में संग-संग रहना ताकि हमेशा बहती रहे मन में स्नेह-निर्मल जलधारा खिलते रहें सम्वेदनाओं के फूल अनुभूतियों का सागर हमेशा-हमेशा
हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर), पालमपुर हिमाचल प्रदेश - 176061
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