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वर्ष- 2, अंक - 15, अगस्त, 2007

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संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दी 


महावीर सरन जैन

.........पूर्वाश

 

संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दी

 

भाषा               स्रोत (1)      स्रोत (2)        स्रोत (3) / स्रोत (4)      

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चीनी मंदारिन         836           800           874          874

हिन्दी                333           550           366          366

स्पेनिश              332           400         322-358      322-358

अँगरेज़ी              322           400           341          341

अरबी                186           200            -             -

रूसी                 170           170           167          167

.फ्रांसीसी               72            90            77           77

 

(1) Encarta Encyclopedia -- Aritcle of Dr. Bernard Comrie (1998)

(2) D. Dalby : The Linguasphere Register of the World's Languages and Speech   Communities, Cardiff, Linguasphere Press (1999)

(3)  Ethnologue, Volume 1. Languages of the World : Edited by Barbara F. Grimes, 14th. Edition, SIL International (2000)

(4)The World Almanac and Book of Facts, World Almanac Education Group, Inc (2003).

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 (1)एनकार्टा एन्साइक्लोपीडिया में  भाषा के बोलने वालो की संख्या की दृष्टि से जो संख्या है वह इस प्रकार है :

 1. चीनी 836 मिलियन (83 करोड़ 60 लाख)

 2. हिन्दी 333 मिलियन (33 करोड़ 30 लाख)

 3. स्पेनिश 332 मिलियन (33 करोड़ 20 लाख)

 4. अँगरेज़ी 322 मिलियन (32 करोड़ 20 लाख)

 5. अरबी 186 मिलियन (18 करोड़ 60 लाख)

 6. रूसी 170 मिलियन (17 करोड़)

 7 फ़्रांसीसी 72 मिलियन (7 करोड़ 20 लाख)

 

(2) दूसरे स्रोत के ग्रन्थ में संख्या  इस प्रकार है -

1.चीनी 800 मिलियन (80 करोड़)

2.हिन्दी 550 मिलियन (55 करोड़)

3.स्पेनिश 400 मिलियन (40 करोड़)

4.अँगरेज़ी 400 मिलियन(40 करोड़)

5.अरबी 200 मिलियन (20 करोड़)

6.रूसी 170 मिलियन (17 करोड़)

7.फ्रैंच 90 मिलियन (9 करोड़)

 

(3) तीन एवं चार स्रोतों के ग्रन्थों के आँकड़े एक जैसे हैं। इसका कारण यह है कि द व:ल्ड अल्मानेक एण्ड बुक ऑफ फैक्ट्स (The World Almanac and Book of Facts) के आँकड़ों का आधार एथनोलॉग ही है।

 

      इन दोनो ग्रन्थों में प्रतिपादित संख्या इस प्रकार है :

1-  चीनी 874 मिलियन (87 करोड़ 40 लाख)

2-  हिन्दी 366 मिलियन (36 करोड़ 60 लाख)

3-  स्पेनिश 322-358 मिलियन (32 करोड़ 20 लाख से 35 करोड़ 80 लाख)

4- अँगरेज़ी 341 मिलियन (34 करोड़ 10 लाख)।

 

    इन ग्रन्थों में अरबी को रिक्त दिखाया गया है। इसका कारण इन ग्रन्थों में यह प्रतिपादित है कि अरबी एक क्लासिकल लैंग्वेज है तथा इन्होंने भाषाओं के जो ऑंकड़े दिये हैं, वे मातृभाषियों के हैं, द्वितीयभाषा वक्ताओं (सैकेन्ड लैंग्वेज स्पीकर्स) के नहीं। इस कारण इन्होनें टेबिल में अरबी लैंग्वेज को नहीं रखा है।

 

    रूसी भाषियों की संख्या 167 मिलियन (16 करोड़ 70 लाख) तथा फ्रेंच भाषियों की संख्या 77 मिलियन (7 करोड़ 70 लाख) है।

 मातृभाषियों की संख्या का अन्तर :-

    तालिका का अध्ययन करने से यह स्पष्ट है कि इन ग्रन्थों में विभिन्न भाषाओं के मातृभाषियों की संख्या के ऑंकड़ों में एकरूपता/समानता नहीं  है। तालिका में स्रोत-2 के ग्रन्थ में हिन्दी भाषियों की संख्या है - 550 मिलियन(55 करोड़) किन्तु तीन एवं चार स्रोत के ग्रन्थों में हिन्दी भाषियों की संख्या प्रतिपादित है - 366 मिलियन (36 करोड़ 60 लाख) । जब वैज्ञानिक ढंग से ऑंकड़े इकट्ठे हो रहे हैं तथा मातृ भाषियों की दृष्टि से ऑंकड़े प्रस्तुत किये जा रहे हैं तो यह अन्तराल क्यों है ? स्रोत 3 एवं 4 के ग्रन्थों का ध्यान से अध्ययन करने के बाद आँकड़ों के अन्तर का रहस्य उद्धाटित हो जाता है। इन ग्रन्थों में हिन्दी के क्षेत्रगत भेदों एवं शैलीगत भेदों को अलग-अलग भाषाओं के रूप में प्रदर्शित किया गया है। हिन्दी भाषा क्षेत्र के अन्तर्गत बोले जाने वाले इन क्षेत्रगत एवं शैलीगत भेदों के मातृभाषियों की जो संख्याएँ प्रतिपादित हैं उन संख्याओं को 366 मिलियन (36 करोड़ 60 लाख) संख्या में जोड़ने पर हिन्दी के मातृभाषियों की संख्या पहुँच जाती है - 553 मिलियन(55 करोड़ 30 लाख) । स्रोत-2 में हिन्दी भाषियों की संख्या का योग है- 550 मिलियन( 55 करोड़)।  स्रोत-3 एवं स्रोत-4 के ग्रन्थों में हिन्दी भाषा के जिन 11 क्षेत्रगत (Regional) तथा शैलीगत (Stylistic) भेदों के मातृभाषियों की संख्या को अलग-अलग प्रदर्शित किया गया है, उनकी संख्याओं का  योग कर देने पर  इन दोनो ग्रन्थों में  हिन्दी भाषियों की संख्या हो जाती है - 553 मिलियन (55 करोड़ 30 लाख)

 

       संसार में ऐसा कोई भाषा क्षेत्र नहीं होता, जिसमें क्षेत्रगत भेद नहीं होते। कहावत है - चार कोस पर बदले पानी, आठ कोस पर बानी।   चीनी भाषा के बोलने वालों की संख्या 700-800 मिलियन (70 करोड़ से 80 करोड़) है तथा उसका भाषा क्षेत्र हिन्दी भाषा क्षेत्र की अपेक्षा बहुत विस्तृत है। चीनी भाषी क्षेत्र में जो भाषिक रूप बोले जाते हैं वे सभी परस्पर बोधगम्य नहीं हैं। जब पाश्चात्य भाषा वैज्ञानिक चीनी भाषा की विवेचना करते हैं तो किसी प्रकार का विवाद पैदा नहीं करते किन्तु स्रोत-3 एवं 4 जैसे ग्रन्थों के विद्वान जब हिन्दी भाषा  की विवेचना करते हैं तो हिन्दी भाषा क्षेत्र के अन्तर्गत बोले जाने वाले हिन्दी भाषा के उपभाषा रूपों को भाषा का दर्जा दे देते हैं। हिन्दी भाषा क्षेत्र के अन्तर्गत भारत के निम्नलिखित राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश समाहित हैं :-1. उत्तर प्रदेश 2. उत्तराखंड 3. बिहार 4. झारखण्ड 5. मध्य प्रदेश 6. छत्तीसगढ़ 7. राजस्थान 8. हिमाचल प्रदेश 9. हरियाणा 10. दिल्ली  11. चण्डीगढ़।

 

      हिन्दी भाषा का क्षेत्र बहुत व्यापक है। हिन्दी भाषा क्षेत्र में ऐसी बहुत सी उपभाषाएँ हैं जिनमें पारस्परिक बोधगम्यता का प्रतिशत बहुत कम है, किन्तु ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से सम्पूर्ण भाषा क्षेत्र एक भाषिक इकाई है तथा इस भाषा-भाषी क्षेत्र के बहुमत भाषा-भाषी अपने-अपने क्षेत्रगत भेदों को हिन्दी भाषा के रूप में मानते एवं स्वीकारते आए हैं। भारत के संविधान की दृष्टि से यही स्थिति है। सन् 1997 में भारत सरकार के सैन्सस ऑफ इण्डिया द्वारा प्रकाशित ग्रन्थ में भी यही स्थिति है।

 

            'खड़ी बोली' हिन्दी भाषा क्षेत्र का उसी प्रकार एक भेद है, जिस प्रकार हिन्दी भाषा के अन्य बहुत से क्षेत्रगत भेद हैं। प्रत्येक भाषा क्षेत्र में अनेक क्षेत्रगत, वर्गगत एवं शैलीगत भिन्नताएँ होती हैं। प्रत्येक भाषा क्षेत्र में किसी क्षेत्र विशेष के भाषिक रूप के आधार पर उस भाषा का मानक रूप विकसित होता है, जिसका उस भाषा-क्षेत्र के सभी क्षेत्रों के पढ़े-लिखे व्यक्ति औपचारिक अवसरों पर प्रयोग करते हैं। पूरे भाषा क्षेत्र में इसका व्यवहार होने तथा इसके प्रकार्यात्मक प्रचार-प्रसार के कारण विकसित भाषा का मानक रूप भाषा क्षेत्र के समस्त भाषिक रूपों  के बीच संपर्क सेतु का काम करता है तथा कभी-कभी इसी मानक भाषा रूप के आधार पर उस भाषा की पहचान की जाती है। प्रत्येक देश की एक राजधानी होती है तथा विदेशों में किसी देश की राजधानी के नाम से प्राय: देश का बोध होता है, किन्तु सहज रूप से समझ में आने वाली बात है कि राजधानी ही देश नहीं होता।

 

      जिस प्रकार भारत अपने 28 राज्यों एवं 07 केन्द्र  शासित प्रदेशों को मिलाकर भारतदेश है, उसी प्रकार भारत के जिन राज्यों एवं  शासित प्रदेशों को मिलाकर हिन्दी भाषा क्षेत्र है, उस हिन्दी भाषा-क्षेत्र के अन्तर्गत जितने भाषिक रूप बोले जाते हैं उनकी समाष्टि का नाम हिन्दी भाषा है। हिन्दी भाषा क्षेत्र के प्रत्येक भाग में व्यक्ति स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय भाषा रूप में बात करता है। औपचारिक अवसरों पर तथा अन्तर-क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं सार्वदेशिक स्तरों पर भाषा के मानक रूप अथवा व्यावहारिक हिन्दी का प्रयोग होता है। आप विचार करें कि उत्तार प्रदेश हिन्दी भाषी राज्य है अथवा खड़ी बोली, ब्रजभाषा, कन्नौजी, अवधी, बुन्देली आदि भाषाओं का राज्य है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश हिन्दी भाषी राज्य है अथवा बुन्देली, बघेली, मालवी, निमाड़ी आदि भाषाओं का राज्य है। जब संयुक्त राज्य अमेरिका की बात करते हैं तब संयुक्त राज्य अमेरिका के अन्तर्गत जितने राज्य हैं उन सबकी समष्टि का नाम ही तो संयुक्त राज्य अमेरिका है। विदेश सेवा में कार्यरत अधिकारी जानते हैं कि कभी देश के नाम से तथा कभी उस देश की राजधानी के नाम से देश की चर्चा होती है। वे ये भी जानते हैं कि देश की राजधानी के नाम से देश की चर्चा भले ही होती है, मगर राजधानी ही देश नहीं होता। इसी प्रकार किसी भाषा के मानक रूप के आधार पर उस भाषा की पहचान की जाती है मगर मानक भाषा, भाषा का एक रूप होता है : मानक भाषा ही भाषा नहीं होती। इसी प्रकार खड़ी बोली के आधार पर मानक हिन्दी का विकास अवश्य हुआ है किन्तु खड़ी बोली ही  हिन्दी नहीं है। तत्वत: हिन्दी भाषा क्षेत्र के अन्तर्गत जितने भाषिक रूप बोले जाते हैं उन सबकी समष्टि का नाम हिन्दी है। हिन्दी को उसके अपने ही घर में तोड़ने का षडयंत्र अब विफल हो गया है क्योंकि 1991 की भारतीय जनगणना के अंतर्गत जो भारतीय भाषाओं के विश्लेषण का ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है उसमें मातृभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार करने वालों की संख्या का प्रतिशत उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड राज्य सहित) में 90.11, बिहार (झारखण्ड राज्य सहित) में 80.86, मध्य प्रदेश (छत्तीसगढ़ राज्य सहित) में 85.55, राजस्थान में 89.56, हिमाचल प्रदेश में 88.88, हरियाणा में 91.00, दिल्ली में 81.64 तथा चण्डीगढ़ में 61.06 है। हिन्दी एक विशाल भाषा है। विशाल क्षेत्र की भाषा है। अब यह निर्विवाद है कि चीनी भाषा के बाद हिन्दी संसार में दूसरे नम्बर की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।

 

      यदि हम सम्पूर्ण प्रयोक्ताओं की संख्या की दृष्टि से बात करें जिसमें मातृभाषा वक्ता (First Language Speakers) तथा द्वितीयभाषा वक्ता(Second Language Speakers) दोनो हों तो हिन्दी भाषियों की संख्या लगभग एक हजार मिलियन (सौ करोड़) है।

 

      दूसरे स्रोत के ग्रन्थ(The Linguasphere Register of the World's Languages and Speech Communities) में इस दृष्टि से हिन्दी भाषियों की संख्या 960 मिलियन मानी गई है । जो प्रमाणिक तथ्य प्रस्तुत हैं उनसे यह निर्विवाद है कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। (साहित्य अमृत से)

 

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

(सेवानिवृत्त निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान)

123, हरि एन्कलेव, चांदपुर रोड,

बुलन्दशहर - 203001

 

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