अमेरिकी साहित्यकारों द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन
न्यूयार्क । आठ्वें विश्व हिन्दी सम्मेलन (13-15 जुलाई)में अमेरिकी हिन्दी साहित्यकारों की हिन्दी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों एवं उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करती स्मारिका, पुस्तक प्रदर्शनी और पुस्तक - विमोचन समारोह का आयोजन किया गया । ज्ञातव्य हो कि आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन का मूल विषय था - विश्व मंच पर हिन्दी। इसे रूपायित करने के लिए एक स्मारिका प्रकाशित की गई थी जिसमें अमेरिकी हिन्दी साहित्य और साहित्यकारों का परिचय संग्रहित किया गया है । आयोजन स्थल पर तीन बहु प्रचारित प्रदर्शनियों के अतिरिक्त अमेरिकी साहित्यकारों की पुस्तकों की एक अलग प्रदर्शनी भी लगाई गई थी जहाँ अमेरिकी साहित्यकारों की २०० से अधिक पुस्तकें रखी हुई थीं । इस प्रदर्शनी में एक ओर जहाँ अमेरिका से प्रकाशित पहली पत्रिका "विश्वा " का १९७५ में प्रकाशित पहला अंक भी दर्शकों के देखने के लिए उपलब्ध था और तमाम पत्रिकाओं, विश्व विवेक, सौरभ, हिन्दी चेतना, क्षितिज, अन्यथा, हिन्दी जगत, विज्ञान प्रकाश आदि की प्रतियाँ मुफ़्त में वितरित की जा रही थीं । इस अवसर पर एक पोस्टर भी प्रदर्शित किया गया जिसमें अमेरिका में हिन्दी भाषा से सम्बन्धित विभिन्न कार्यक्रमों की सचित्र झलकियाँ थी । इस पोस्टर में १९६० से आज तक की चुनी हुई तस्वीरें उपलब्ध थीं । प्रदर्शनी की खासियत यह भी थी कि जिन रचनाकारों की पुस्तकें सजायीं गयीं थीं उनके चित्र भी वहाँ पर थे । तीन दिनों तक चली इस प्रदर्शनी को कई साहित्यकारों और हिंदी सेवियों ने सराहा ।
तीन दर्जन से अधिक कृतियों का विमोचन
अमेरिका के पच्चीस रचनाकारों की सैंतीस पुस्तकों का विमोचन भी विश्व हिन्दी सम्मेलन के पहले दिन विदेश मंत्री आनन्द शर्मा ने किया । इस समारोह के लिए विमोचित होनेवाली तमाम पुस्तकों के कवर पेज का एक आकर्षक पोस्टर तैयार किया गया था और इस विमोचन समारोह में वरिष्ठ लेखिका और कवियित्री सुनीता जैन , सुषम बेदी, अन्जना संधीर, पुष्पा सक्सेना आदि से लेकर नवोदित लेखिक - लेखिकाओं जैसे, इला प्रसाद, शशि पाधा, देवी नांगरानी, अमरेन्द्र कुमार, अभिनव शुक्ल, कुसुम सिन्हा आदि की पुस्तकें भी थीं । भारत के विभिन्न छोटे-बड़े प्रकाशनों, जैसे नेशनल बुक ट्रस्ट, वाणी प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन, पेंग्विन इंडिया, जनवाणी प्रकाशन, पार्श्व पब्लिकेशन्स ,जयभारती, हर्ष प्रकाशन, अल्फ़ा प्रिंटिग ( कैलीफ़ोर्निया) आदि ने अमेरिका के लेखकों की किताबें प्रकाशित कर इस महायज्ञ में सहर्ष सहयोग दिया । इस सारे आयोजन की परिकल्पना डॉ अन्जना संधीर की थी और उनके परिश्रम से इसे बखूबी अन्जाम मिला ।
(इला प्रसाद के साथ शशि पाधा की रिपोर्ट)
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