ई-पताः srijjangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 15, अगस्त, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

   छंद

 

आप न आये


परवीन हक़

 

दिन काटे हैं रैन सताये, सावन फिर से बीता जाये

कौन मेरे दिल को समझाये, आप न आये आप न आये ।

 

मौसम तन में आग लगाये, मुँह से निकले हरदम हाय

मौसम आये मौसम जाये, आप न आये आप न आये ।

 

साजन कब तक मुझसे मिलेंगे, जाने कब मेरे भाग खिलेंगे

साजन बिन मन चैन न पाये, आप न आये आप न आये ।

 

 हाय रे ये मजबूरी मेरी, जान न ले ले दूरी मेरी

आँख भी हरदम नीर बहाये, आप न आये आप न आये ।

 

देस भी अब परदेश है मेरा, जोगन वाला भेस है मेरा

चाँदनी मेरा ज़िस्म जलाये, आप न आये आप न आये ।

 

पुरवाई तू मुझको न छूना, आँगन है परवीन का सूना

कोई उन्हें ये हाल बताये, आप न आये आप न आये ।

परवीन हक़

जबलपुर, मध्यप्रदेश

 

 

 

गीतकार

 

मुकुंद कौशल

डॉ. कमलेश व्यास

वीरेन्द्र आस्तिक

परवीन हक़

डॉ. गणेशदत्त सारस्वत

डॉ. शरद नारायण खरे

सूर्यदेव पाठक 'पराग'

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google
WWW http://www.srijangatha.com