आप न आये
परवीन हक़
दिन काटे हैं रैन सताये, सावन फिर से बीता जाये
कौन मेरे दिल को समझाये, आप न आये आप न आये ।
मौसम तन में आग लगाये, मुँह से निकले हरदम हाय
मौसम आये मौसम जाये, आप न आये आप न आये ।
साजन कब तक मुझसे मिलेंगे, जाने कब मेरे भाग खिलेंगे
साजन बिन मन चैन न पाये, आप न आये आप न आये ।
हाय रे ये मजबूरी मेरी, जान न ले ले दूरी मेरी
आँख भी हरदम नीर बहाये, आप न आये आप न आये ।
देस भी अब परदेश है मेरा, जोगन वाला भेस है मेरा
चाँदनी मेरा ज़िस्म जलाये, आप न आये आप न आये ।
पुरवाई तू मुझको न छूना, आँगन है परवीन का सूना
कोई उन्हें ये हाल बताये, आप न आये आप न आये ।
परवीन हक़
जबलपुर, मध्यप्रदेश
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