काश मेरी मुट्ठियों में...
मुकुंद कौशल
काश मेरी मुट्ठियों में प्यार के कुछ गीत होते ।
भोर की पहली किरन-सा
मीत कोई गीत गाता
प्यार के पहले चरण की
रीत कोई गुनगुनाता
मैं लगा लेता सपन की झील में दो चार गोते ।
हाथ में जो हाथ होता
साथ होते हम समय के
मौन ही रहते अधर पर
तार बज उठते प्रणय के
पास बैठे हम सदा ही अर्थ जीवन के पिरोते ।
झूमकर देती निमंत्रण
स्नेह से सुरभित दिशाएँ
बोलती कानों में आकर
ओस से भीगी हवाएँ
श्वाँस के संदर्भ बोकर साथ हँसते, साथ रोते ।
मुकुंद कौशल
दुर्ग, छत्तीसगढ़
![]()
![]()
![]()

