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वर्ष- 2, अंक - 15, अगस्त, 2007

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   छंद

 

अधरों की कोरों से


डॉ. कमलेश व्यास

 

बादलों से चाँद ने निकल कर

तेरे आने की खबर दे दी ।

हर कली ने शाख पे मचलकर

सेज सजाने की खबर दे दी ।

 

तेरी ही अँगड़ाई झरनों में झलकाई

अल्हड़ यौवन डोले ज्यों नदियाँ उफनाई ।

भँवरे ने फूल से लिपटकर प्यार हो जाने की खबर दे दी ।

 

आँखें ये मदमाती, मधुर-मधुर मुस्काती

अधरों की कोरों से, मधु-प्याले छलकाती ।

बासंती पवनों ने चलकर मीत सुहाने की खबर दे दी ।

 

चपल-चपल चितवन है, बेकाबू धड़कन है

बिखरी जुल्फ़ें हैं तेरी, बहका-बहका मन है ।

कँपकँपाते पाँव ने फिलसलकर दिल के दीवाने की खबर दे दी ।

डॉ. कमलेश व्यास

पनागर, जबलपुर

 

 

 

गीतकार

 

मुकुंद कौशल

डॉ. कमलेश व्यास

वीरेन्द्र आस्तिक

परवीन हक़

डॉ. गणेशदत्त सारस्वत

डॉ. शरद नारायण खरे

सूर्यदेव पाठक 'पराग'

 

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