अधरों की कोरों से
डॉ. कमलेश व्यास
बादलों से चाँद ने निकल कर
तेरे आने की खबर दे दी ।
हर कली ने शाख पे मचलकर
सेज सजाने की खबर दे दी ।
तेरी ही अँगड़ाई झरनों में झलकाई
अल्हड़ यौवन डोले ज्यों नदियाँ उफनाई ।
भँवरे ने फूल से लिपटकर प्यार हो जाने की खबर दे दी ।
आँखें ये मदमाती, मधुर-मधुर मुस्काती
अधरों की कोरों से, मधु-प्याले छलकाती ।
बासंती पवनों ने चलकर मीत सुहाने की खबर दे दी ।
चपल-चपल चितवन है, बेकाबू धड़कन है
बिखरी जुल्फ़ें हैं तेरी, बहका-बहका मन है ।
कँपकँपाते पाँव ने फिलसलकर दिल के दीवाने की खबर दे दी ।
डॉ. कमलेश व्यास
पनागर, जबलपुर
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