किशोर दिवसे द्वारा
The realm of fancy
पंखिल भावनाओं का साम्राज्य
मूल रचनाःजॉन कीट्स
उड़ने दो पंखिल भावनाओं को
सहेजकर नहीं रख सकते तुम हर्ष
जो स्पर्श की ऊष्मा से हो जाता है द्रव
जैसे पावस बूंदों से बनकर गुम होते हैं बुलबुले
तब उड़ने दो पंखिल भावनाओं को,
जो लिपटी है पांखीमन के इर्दगिर्द
खोल दो अपने मन मेंदिर के द्वार
विद्युत आवेश की तरह बहेंगी भावनाएं
प्रिय भावना, तुम हो जाओ उन्मुक्त
क्योंकि चुक जायेगा ग्रीष्म का उल्लास
और ऋतुराज वसंत का उन्माद भी
स्खलित होगा मेंजरी की तरह
ग्रीष्म के तप्त लाल ओंठ भी
थरथरायेंगे, कुहासे और ओस से भीगकर
और तृप्त कर देंगे अपने रसास्वाद से,
तब फिर क्या करेंगे हम !
बैठेंगे उन अलावों के निकट जहाँ,
दहकेगा, सूखे काष्ठ का ईंधन
सर्दरात में आत्मशक्ति की तरह,
मौन,सहमी धरा तब होगी परिवेष्टित,
और .......हल जोतते भूमिपुत्र के पादत्राण से,
तार....तार.....होगी, धवल वर्षा की चादर
स्याह साजिश के साथ,जब रात पसरती है
आकाश से छिटककर दोपहर दूर हो जाती है
हम बैठेंगे वहाँ पर आत्मसम्मोहन की तंद्रा में
तब भी ....उड़ने दे पंखिल भावनाओं को
किशोर
दिवसे
जनता क्वार्टर, ई.डब्लयू.एस – 67
नेहरूनगर, बिलासपुर
छत्तीसगढ़ - 495001
