पूरे देश में चुनाव एक साथ होने से सरकारों पर चुनावी दबाव घटने से फायदा होगा

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से रोज सड़कों पर होने वाले प्रदर्शन बढ़ गए हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं को मालूम है कि कुछ महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, तो बहुत से नेताओं की नजरों में कोई न कोई सीट…Read More »

रोहित ठाकुर की कविताएँ

 नदी  एक पुरुष का अँधेरापन  कम करती है औरत औरत के अँधेरेपन को  कम करता है पेड़ पेड़ के अँधेरेपन को  कम करती है आकाशगंगा तारों का जो अँधेरापन है उसे सोख लेती है नदी नदी के अँधेरे को मछली अपने आँख…Read More »

संस्मरण : लिखना तो बहाना है

कई बार मैंने अपने पिताजी से आग्रह किया कि पिताजी दादाजी के बारे में कुछ बताएं? सुना है दादाजी धनी-मनी, निर्भीक, बहादुर, उदारमना व्यक्ति थे। जरूरतमन्दों की धन आदि से बड़ी मदद करते थे, घोड़ी पर चलते थे, पढे-लिखे भी थे? परन्तु,…Read More »

इस्लाम और आतंकवाद

इस दौर में *मज़हब ए इस्लाम* को आतंकवाद से इस तरह जोड़ दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम के सामने इस्लाम का शब्द ही बोलता है तो उसके मन में तुरंत आतंकवाद का ख्याल घुमने लगता है जैसे…Read More »

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

 रिक्शावाले का गीत  यह रिक्शा नहीं , देह मेरी का है विस्तार  यह चढ़ी सवारी , प्राण–वायु पर पड़ता भार  यह कुछ रुपयों के बदले पड़ी देह पर मार  आदमी पर आदमी चढ़ा , जनतंत्र का कैसा प्रकार                             काम वाली बाई का गीत                        झाड़ू–पोंछा करके अपना घर–बार चलाती हूँ                        यह भीख नहीं , मेहनत करके संसार चलाती हूँ   …Read More »

ओमप्रकाश कश्यप की लघुकथाएँ

देवता का भय भीषण दरिद्रता, भूख–प्यास, गरीबी देखकर अकुलाए एक भलेमानुष ने दुनिया बचाने की ठान ली। समाधान की खोज में चलता–चलता वह क्षीर–सागर तक पहुंचा. आंखों के सामने दूध का समंदर लहराते देख उसके आनंद का पारावार न रहा— ‘यहां मेरी चिंताओं का समाधान संभव…Read More »

साहित्य में उठाने गिराने का खेल

पिछले दिनों एक छोटे से साहित्यिक जमावड़े में बात‘नई वाली हिंदी’ से शुरू हुई, जिसमें उन कृतियों पर लंबी बात हुई, फिर अन्य प्रकाशनों से प्रकाशित होनेवाले छोटे-छोटे उपन्यासों पर चर्चा चल निकली। वहां से होते होते साहित्य के तथाकथित मुख्यधारा के लेखन…Read More »

पुश्किन की धरती पर टैगौर के अनुयायी

सृजनगाथा डॉट. कॉम. के बैनर तले रूस की सरजमीं पर राजधानी मॉस्को में आयोजित होने वाला यह 15वां अंतराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन था । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़/साहित्यिक वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट…Read More »

इस डिजिटल जमाने में चाल-चलन ठीक रखें

मध्यप्रदेश में आत्महत्या करने वाले, संत कहे जाने वाले, भय्यूजी महाराज के टेलीफोन से तीन नंबरों पर सौ-सौ बार बात होने की खबर आई है। पुलिस की जांच इन दिनों कुछ आसान हो गई है क्योंकि इंसानों ने बिना फोन, बिना सोशल…Read More »

शशिबाला की कविताएं

By | June 15, 2018

कवि तो कहेगा जब जब सूरज को देखेगा उसके उगने की बात कहेगा समुद्र के गर्भ से शनैः शनैः ऊपर उठने की नरम गुलाबी रंगत से बदल कर गर्म अग्नि में बदलने की पूरे आकाश को लांघ कर धीरे धीरे नीचे उतरने…Read More »