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संपादकीय
कुछ कहना लाज़िमी है
-
जयप्रकाश मानस
हिन्दी के नये पाठकों की सबसे बड़ी लाचारगी है कि उसकी
पाठकीयता में पुरातन का रोमांस नहीं है । वह अपने इतिहास
पुरुषों से विमुख रहता है । अतीत की चमक को आधुनिकता के संभ्रम
में लगातार नज़रअंदाज़ करते चला जाता है। आज हिन्दी की
बड़ी-बड़ी पत्रिकाओं में पुरानी पीढ़ी को बिसारने की जैसे होड़
लगी हो । यह नहीं भूलें कि समकालीनता अतीत से ही रस लेती है।

कहानी
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क्रेज़ी
फ़ैंटेसी की दुनिया
-
अभिज्ञात
प्रोफ़ेसर पश्चाताप की आग में जलने
लगे। अब वे अनुसंधान केन्द्र बेहद कम जाते। बच्ची के साथ अधिक
से अधिक वक़्त गुज़ारते। बच्ची को कहानियाँ सुनने का बड़ा शौक
था। और उसकी ज़िद पर वह रोज़ रात को कहानियाँ सुनाते। बचपन में
सुनी और बाद में पढ़ी कहानियाँ को उनका स्टाक ज़ल्दी ही ख़त्म हो
गया किन्तु बेटी की फ़रमाइशें जारी रहीं। अब वे मनगढ़ंत किस्से
सुनाने लगे थे और ज़ल्द ही इसमें माहिर हो गये।
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छँटा कोहरा
-
किरण राजपुरोहित

ललित
निबंध
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एक पेड़ चाँदनी
-
विश्वनाथ प्रसाद
चाँदनी का पेड़ लोग बहुत दिनों से
लगा रहे हैं । हज़ारों साल से आदमी जुझ रहा है, चाँदनी का पेड़
उगाने के लिए। ऐसा नहीं कि किसी एक जगह चाँदनी की खेती की गयी
। कुछ ऐसी भी ज़मीनें थीं जो सारे बीज को निगल गईं । जो पानी
डाला गया, उसे भी पी गईं । फिर भी आदमी हारा नहीं । सही बात तो
यह है कि चाँदनी अमूर्त है ।
लघुकथा
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सेवा
-
संजय कुमार
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चार लघुकथाएं
-
भगीरथ
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घर
फूँक तमाशा देख
-
ललिता भाटिया
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संतोष
-
ओमीना राजपुरोहित 'सुषमा'
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मृगतृष्णा
-
साधना सोलंकी
संस्मरण
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ख़तो किताबत पर बड़ा भरोसा था
नईम को - विनोद साव
ख़तो-किताबत पर कितना भरोसा था नईम सा हब
को ! ख़तो-किताबत इन शब्दों को जानते हुए भी इन्हें
पहली बार नईम साहब से ही सुना। उनके एक ही पत्र से यह
जाहिर होता है कि वे ख़तो-किताबत यानी पत्र-व्यवहार के
प्रति कितने संजीदा इन्सान थे। अमूमन आज फ़ोन और
मोबाइल के इस समय में यह चलन बहुत कम हो गया है ।

कथोपकथन
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बरगद जेठ और मोर है देवर..-
सुलोचना रांगेय
(सुलोचना
रांगेय राघव से साधना सोलंकी की बातचीत)
मैंने
हमेशा
रांगेय
राघव
की
ही
छवि
ढूँढनी
चाही...पर
वे
तो
एक
ही
थे।
अपनी
अस्वस्थता
में
भी
वे
बराबर
चिंतन
मनन
करते,
कभी
कविताएँ
लिखते,
कभी
चित्र
बनाते।
अंत
तक
पूरी
कर्मठता
और
जिजीविषा
के
साथ
रहे।
मुझे
बराबर
पढऩे
और
आर्थिक
रूप
से
स्वतंत्र
रहने
की
हिदायत
देते
रहे।
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मुरौव्वत में घटिया सामग्री छप जाती है
-
रवीन्द्र कालिया
(रवीन्द्र
कालिया से दिनेश श्रीनेत की बातचीत)

पुस्तकायन
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यक्ष प्रश्न-डॉ.
अजय पाठक
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Marrying Anita-Anita
jain
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पृथ्वी पर एक जगह-शिरीष
मौर्य

ग्रंथालय में (ऑनलाइन किताबें)
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लौटते हुए परिंदे(कहानी संग्रह)
- सुरेश तिवारी
◙
इंद्रधनुष (कविता संग्रह)
-
डॉ. महेन्द्र भटनागर
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प्रिय कविताएँ
(कविता संग्रह) -
भगत सिंह सोनी

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