सुशी सक्सेना की कविताएँ

शब्दों की महिमा मैं शब्द हूँ, अपनी महिमा तुमको क्या बतलाऊँ मैं, मीठा हूँ तो गैर भी अपने हैं, कड़वा बनके अपनों को दूर भगाऊँ मैं। खंजर, चाकू और कटार सब के सब धरे रह जायें, ऐसी गहरी चोट लगे मन में,…Read More »

‘शहर-दर-शहर उमड़ती है नदी’

हिन्दी जगत में मुझे नहीं लगता है कि उद्भ्रांत जी का नाम किसी परिचय का मोहताज है। हिन्दी साहित्य के विराट फ़लक पर उन्होंने अनेक कालजयी महाकाव्यों जैसे ‘अभिनव पांडव’, ‘राधामाधव’, ‘त्रेता’, ‘वक्रतुंड’ और ‘अनाद्यसूक्त’ तथा काव्य नाटक ‘ब्लैक होल’ और लंबी कविता ‘रुद्रावतार’ सहित शताधिक कृतियों की रचना की है। यही नहीं, लेखन…Read More »

सेक्यूलर चोले में लीगी पाठ पढ़ते-पढ़ाते लोग

सेक्यूलर चोले में लीगी पाठ पढ़ते – पढ़ाते लोग फ़ेसबुक पर बुरी तरह सक्रिय हैं । इन में  ही से एक हैं ओबैद नासिर । मुस्लिम हैं सो सेक्यूलरिज्म पर इन का कॉपीराइट है । गोया कोई और सेक्यूलर हो ही नहीं…Read More »

डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया सम्मान समारोह 2018  

लालगंज (रायबरेली) बैसवारा इंटर कालेज के सभागार में कव्यालोक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने सुप्रसिद्ध गीतकार रहे डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती पर साहित्यकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया, जिसमें एक दर्जन से अधिक कवियों और साहित्यकारों को सुप्रसिद्ध साहित्यकारों…Read More »

साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता

इंटरनेट की दुनिया ने हिंदी या कहे प्रत्येक भाषा के साहित्य और लेखन को जनमानस के करीब और उनकी पहुँच में ला दिया है, इससे रचनाकारों की लोकप्रियता में भी अभिवृद्धि हुई है।  किन्तु इन्ही सब के बाद उनके सृजन की चोरी…Read More »

‘सेक्रेड गेम्स’ पर शांति का षडयंत्र

इन दिनों भारतीय वेब-टेलीविजन सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’की चारों ओर चर्चा हो रही है, देश-विदेश के अखबारों में इस क्राइम थ्रिलर पर लेख लिखे जा रहे हैं, इसकी समीक्षा हो रही है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहुत चर्चा हो रही है। इस…Read More »

पूरे देश में चुनाव एक साथ होने से सरकारों पर चुनावी दबाव घटने से फायदा होगा

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से रोज सड़कों पर होने वाले प्रदर्शन बढ़ गए हैं। राजनीतिक दलों के नेताओं को मालूम है कि कुछ महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, तो बहुत से नेताओं की नजरों में कोई न कोई सीट…Read More »

रोहित ठाकुर की कविताएँ

 नदी  एक पुरुष का अँधेरापन  कम करती है औरत औरत के अँधेरेपन को  कम करता है पेड़ पेड़ के अँधेरेपन को  कम करती है आकाशगंगा तारों का जो अँधेरापन है उसे सोख लेती है नदी नदी के अँधेरे को मछली अपने आँख…Read More »

संस्मरण : लिखना तो बहाना है

कई बार मैंने अपने पिताजी से आग्रह किया कि पिताजी दादाजी के बारे में कुछ बताएं? सुना है दादाजी धनी-मनी, निर्भीक, बहादुर, उदारमना व्यक्ति थे। जरूरतमन्दों की धन आदि से बड़ी मदद करते थे, घोड़ी पर चलते थे, पढे-लिखे भी थे? परन्तु,…Read More »

इस्लाम और आतंकवाद

इस दौर में *मज़हब ए इस्लाम* को आतंकवाद से इस तरह जोड़ दिया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम के सामने इस्लाम का शब्द ही बोलता है तो उसके मन में तुरंत आतंकवाद का ख्याल घुमने लगता है जैसे…Read More »